Home Jhabua जनजाति विकास मंच ने जनजातीय अधिकारी कर्मचारियो का सम्मेलन आयोजित किया

जनजाति विकास मंच ने जनजातीय अधिकारी कर्मचारियो का सम्मेलन आयोजित किया

48
0

झाबुआ। राकेश पोद्दार।नगर संवाददाता। स्थानीय शारदा विद्या मंदिर मंे जनजाति विकास मंच झाबुआ का जिला स्तरीय जनजातीय अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें जनजातीय समाज के समस्त संवैधानिक अधिकारो का गहन संवाद हुआ।
जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डाॅक्टर मिलिंद जी दांडेकर मुख्य रूप से सम्मिलित हुये। जिसमें उन्होने जनजातीय समुदाय के संवैधानिक अधिकारो और भार के जनजाति समुदाय के प्रति विदेशो का विचार एवं भार की विशेषता आदि विषयो पर जोर देते हुये कहा कि जनजातीय समुदाय को जिसने देखा वैसा नाम दे दिया। लेकिन ऐसा नही है भारत में जनजाति समाज स्वाभिमानी समाज के रूप में स्थापित है और रहेगा। जनजाति समुदाय में जो स्वतंत्रता सेनानी हुए है और जो समाजसेवी हुए है वे अद्वितिय है। उसमें बिरसा मुंडा, टंट्या भील हो रानी दुर्गावती हो आदि अनेको स्वतंत्रता सेनानी है जिन्होने जनजाति समाज की पहचान देश और दुनिया में दिलाई है।
9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस को लेकर के भी उन्होने अपनी बात रखी और कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वल्र्ड इंडिजिनियस डे घोषित भारत में लागू नही होता है। क्योकि भार की सुप्रीम कोर्ट में इसको अस्वीकार किया है। ओर भारत के प्रतिनिति जो थे उन्होने भी और अस्वीकार किया है। जनजाति समाज को भ्रमित करने के लिए वैश्विक षडयंत्र चल रहा है जिसमें हम सभी जिम्मेदार शिक्षित लोगो का कर्तव्य है कि इस भ्रम से बचे और समाज को सही दिशा की ओर अग्रसर करे। उन्होने पाक्सो एक्ट, वनाधिकार कानून , 5वी 6 वी अनुसूची के संबंध में भी विस्तृत संवाद किया और उन्होने मार्गदर्शन किया।
इस वक्त जनजातीर्य कार्य के प्रांत पालक श्री रूपसिंह नागर भी उपस्थित हुए। उन्होने जनजाति समुदाय की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि जनजातीय अधिकारी कर्मचारियो को अपने समाज में विस्तृत रूप से शिक्षा का प्रचार प्रसार करना चाहिए और जागरूकता फैलाना चाहिए ताकि हमारा देश हमारा समाज शिक्षित हो और भारत की प्रगति पर अपनी भूमिका अदा की। जनजाति कार्य के रतलाम विभाग पालक राजेश डावर ने भी अपने संबोधन मे कहा कि हमारी जनजाति परंपरा एवं संस्कृति और रीति रिवाज हमें सनातनी होने का प्रमाण देती है। वर्षो से हमारा जनजाति समाज गांव की खेडा देवी बाबा हनुमान सावन माता और अनेको ऐसी परम्परा है नवाई , मांडलू, जातर , सलावणी आदि कार्यक्रमो को करके हमारे सनातन परम्परा को सुरक्षित रखने का कार्य जनजाति समाज शुरू से करता आया है। यह किसी बाहरी व्यक्ति ने हमारे समाज को नही सिखाया बल्कि हमारे पूर्वज करते आए है। वर्तमान मंे हमारे जनजाति समाज को कुछ वैश्विक षडयंत्र के माध्यम से लोग गुमराह कर रह है। और हिन्दू ना होना बता रहे है जो हमारे समाज को पहचान मिटाने है का षडयंत्र है।
इस जनजाति अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन में उपस्थित दीवान भूरिया , संजय मखेाड, जवानसिंह बारिया, धूलसिंह निनामा, शंकर सिंह बामनिया, मगनसिंह कटारा, गुलसिंह भूरिया , उदयसिंह बिलवाल, कांतिलाल कामलिया, कृष्णासिंह गामड, मदनसिंह वसुनिया,प्रताप सिंह चैहान, धूमसिंह सिंगाड, हेमचंद सिंगाड आदि कर्मचारी अधिकारीगण उपस्थित हुऐ।
इस वक्त जनजाति विकास मंच के संजय भाबर यशवंत बामनिया संजय सोलंकी अल्केश मेडा वालसिंह मसानिया शैलेन्द्र सोलंकी आदि कार्यकर्तागण उपस्थित हुए। अंत में कार्यक्रम का आभार जनजाति विकास मंच के जिला पूर्णकालिक गौसिंह कटारा ने माना।