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सावन सोमवार 2021: इस बार रहेगा छोटा सावन, 15 दिन का होगा कृष्ण पक्ष व 14 दिन का शुक्‍ल पक्ष,जानिए सोमवार के सभी व्रतों की पूरी सूची

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बारिश का मौसम आरंभ होते ही भक्‍तों के मन में शिवभक्ति की भावनाएं हिलोरे मारने लगती हैं और सभी लोग सावन का इंतजार करना शुरू कर देते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का पांचवां महीना माना जाने वाला सावन इस बार 25 जुलाई से शुरू होगा और 22 अगस्‍त को इसका समापन होगा। इस बार कुल 4 सोमवार पड़ेंगे।

इस साल सावन का माह छोटा रहेगा। एक दिन तिथि वय होने के कारण सावन केवल 29 दिन का रहेगा यह माह भगवान शिव का सबसे प्रिय है। सावन में कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का क्षय है लेकिन कृष्ण पक्ष में छठ तिथि दो हो गई है। ऐसे में कृष्ण पक्ष तो पूरे 15 दिन का होगा। लेकिन शुक्ल पक्ष 14 दिन का ही रहेगा। सावन की शुरुआत 25 जुलाई रविवार श्रवण, घनिष्ठा नक्षत्र के द्विपुष्कर योग में होगी। सावन में चार सोमवार तथा दो प्रदोष व्रत विशेष रहेंगे। कल्कि जयंती, नाग पंचमी 13 अगस्त को मनाई जाएगी। सावन माह में 8 अगस्त को पित्र कार्य अमावस्या रहेगी। वहीं सावन की पूर्णिमा पर को रक्षाबंधन रहेगा। 30 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

श्रावण को शिवत्व का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। श्रावण शब्द श्रवण से बना है. जिसका अर्थ है सुनना अर्थात सुनकर धर्म को समझना इस माह में सत्संग का बहुत ही ज्यादा महत्व है। हिंदू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माना गया है। इसलिए इस पूरे महीने में व्रतों का पालन करना चाहिए। यदि कोई साधक पूरे महीने व्रत नहीं रख सकता है तो उसे चार सोमवार के व्रत अवश्य रखने चाहिए।

व्रत से बढ़ती है सुख-समृद्धि सावन के सोमवार के व्रत रखने से सुख शांति और समृद्धि बढ़ती है। वहीं साधु संन्यासियों को सोमवार व्रत से भगवत कृपा के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। अविवाहित युवतिया सावन के सोमवार का व्रत करती है तो उत्तम वर मिलता है और सुहागिन महिलाओं को सौभाग्य, सुख की प्राप्ति होती है। गृहस्थ के से परिवार में प्रेम और बनता है।

सावन सोमवार के व्रत की सूची

सावन के प्रत्‍येक सोमवार को भक्‍तजन व्रत करके शिवजी की जलाभिषेक करते हैं और भांग, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाकर पूजा करते हैं। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं और प्रार्थना करती है। मान्यता है कि सावन सोमवार के व्रत करने से भगवान शिव भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

इन दिन रहेंगे

सोमवार 26 जुलाई

सोमवार 2 अगस्त

सोमवार 9 अगस्त

सोमवार 16 अगस्त

व्रत और पूजाविधि

सोमवार को सुबह जल्‍दी उठें और स्‍नान करके श्रद्धापूर्वक शिवजी का स्‍मरण करें और व्रत करने का संकल्‍प लें। उसके बाद शिवजी का पानी से, दूध से, शहद से, गंगाजल से और दही से अभिषेक करें। उसके बाद बेलपत्र, फूल, फल, भांग, धतूरा चढ़ाकर ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करते रहें। प्रसाद और भोग अर्पित करें। महिलाएं माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्‍तुएं अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें और शिवजी की आरती करके पूजा का समापन करें। साथ ही दान करें।

 भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र…

– ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

– ऊँ नम: शिवाय।।

– ओम साधो जातये नम:।।

– ओम वाम देवाय नम:।।

– ओम अघोराय नम:।।

– ओम तत्पुरूषाय नम:।।

शिवलिंग पर क्या चीजें नहीं चढ़ाने की है मान्यता:

मान्यतानुसार शिवलिंग पर तुलसी के पत्तों को चढ़ाना निषेध माना गया है। इसके अलावा खंडित यानी टूटे हुए चावल, कुमकुम, हल्दी, नारियल, तिल और शंख से जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।

भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाएं

हल्दी का संबंध भगवान व‌िष्‍णु और सौभाग्य से है, इसल‌िए यह भगवान श‌िव को नहीं चढ़ता है। अगर ऐसा आप करती हैं तो इससे आपका चंद्रमा कमजोर होने लगता है और चंद्रमा कमजोर होने से आपका मन चंचल हो जाएगा आप किसी एक चीज में मन लगाकर काम नहीं कर पाएंगे।

तांबे के पात्र में जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, पूरी होंगी मनोकामनाएं

इस दिन सुबह सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान करें. स्नान के बाद पूजा आरंभ करें. इस दिन तांबे का पात्र लेकर उसमें कुछ चावल, दूध, शहद, दही, फूल, बेल पत्री, गंगाजल आदि मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं. अभिषेक के दौरान शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए. इस दिन दान आदि भी कर सकते हैं.

सावन सोमवार व्रत रख रहे हैं तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान…

ऐसी मान्यता है कि सावन व्रत रखने वालों को बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि शिव की पूजा में तुलसी के पत्तों और केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। शिवलिंग को कभी हल्दी और कुमकुम नहीं लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग का नारियल के पानी से अभिषेक भी नहीं करना चाहिए। हालांकि भगवान शिव की प्रतिमा पर नारियल का फल अर्पित करना शुभ होता है। शिवलिंग का अभिषेक करते समय कास्य और पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करना शुभ माना गया है।

Shiv Aarti (ॐ जय शिव ओंकारा… आरती)…

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे ।कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

सावन सोमवार पर शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन शिव मंत्रों का जाप जरूर करें

ॐ नमः शिवाय॥नम: शिवाय॥ॐ ह्रीं ह्रौं नम: शिवाय॥ॐ पार्वतीपतये नम:॥ॐ पशुपतये नम:॥ॐ नम: शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नम: ॐ ॥

 

(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)