Home Bhopal कोरोना की दूसरी लहर मानव रचित : डॉ सरमन सिंह

कोरोना की दूसरी लहर मानव रचित : डॉ सरमन सिंह

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अफवाहों से बचें और सेल्फ लाकडाउन में रहे लोग प्रो. केजी सुरेश

वैक्सीन से ही टूट सकेगी चेन: मार्गरेट ग्वाडा

एमसीयू में युवा और कोविड-19′ विषय पर विशेष व्याख्यान

 

भोपाल। एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. सरमन सिंह ने कहा कि कोरोना को रोकने के लिए वैक्सीन और सोशल वैक्सीन यानी मास्क बहुत आवश्यक है। इन दोनों तरीकों से हम अपने परिवार और दुनिया को बचा सकते हैं। कोरोना से निपटने के लिए यही हथियार है। उन्होंने कहा कि मास्क कोरोना वायरस के नए रूप को भी रोक सकेगा। आमजन स्वयं इलाज न करें, डॉक्टरों के अनुसार चलें। वहीं, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने आव्हान किया कि लोग सेल्फ लाकडाउन में रहें और फेक कंटेंट से बचें। इसे शेयर न करें। आज इस परिस्थिति में जागरूकता ही सबसे महत्वपूर्ण है और एसएमएस यानी कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

            एमसीयू और यूनिसेफ की ओर से ‘युवा और कोविड-19’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. सिंह ने कहा कि कोरोना के कारण स्वास्थ्य सेवाएं भारी दबाव में हैं। हमारे हेल्थ केयर वर्कर्स बहुत तनाव का सामना कर रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर मानव रचित है, इसे मानव ही रोक सकते हैं। पहले दौर में हम मान रहे थे कि युवा इससे प्रभावित नहीं होंगे और उस दौरान अधिक उम्र वाले व्यक्ति कोरोना से ज्यादा प्रभावित हुए और मृत्यु भी उन्हीं लोगों की ज्यादा हुई। इस बीच इकोनामी को सुधारने के लिए हमने कई तरह की छूट दी और उसके बाद युवा वर्ग ही सबसे पहले बाहर आया। आज युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वायरस का इनफेक्टिव डोज 25 परसेंट हो गया है, जिसमें अब कम संख्या में वायरस से भी लोग संक्रमित हो रहे हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे वैक्सीन के बीच में 6 से 8 सप्ताह का अंतराल रखना चाहिए।

            कार्यक्रम में यूनिसेफ की चीफ मार्गरेट ग्वाडा ने कहा कि युवा मध्यप्रदेश में परिवर्तन के उत्प्रेरक हैं और वे कोविड को लेकर सही जानकारी को फ़ैलाने में मददगार हो सकते हैं। सभी के लिए कोरोना से लड़ाई का तरीका है- कोविड अनुरूप व्यवहार, टीकाकरण, और फेस्मास्क का उपयोग। यह सभी को करने की आवश्यकता है। उन्होंने आव्हान किया कि युवा खुद भी वैक्सीन लगाएं और अपने रिश्तेदारों को भी लगवाने के लिए प्रेरित करें। तभी यह चेन टूट सकेगी।

            कार्यक्रम में यूनिसेफ के कम्युनिकेशन विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने कहा कि युवाओं को यह जानकारी होना चाहिए कि टीकाकरण से क्या लाभ होगा।  मीडिया से जुड़े विद्यार्थी अपनी क्रिएटिव स्किल्स का उपयोग करके इस बारे में जानकारी समाज में संप्रेषित कर सकते हैं। यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ रविंद्र बगल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अधिकारिक सूचना स्त्रोतों पर ही भरोसा करें और उनके द्वारा दी गई जानकारी ही सोशल मीडिया पर शेयर करें। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक लालबहादुर ओझा ने किया। आभार प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ पवित्र श्रीवास्तव ने माना।

            इस अवसर पर विश्वविद्यालय की पूर्व संकाय सदस्य डॉ. दविंदर कौर उप्पल और शिक्षक श्रीमती संगीता जैन, कर्मचारी भरत हरतालकर के प्रति शोक व्यक्त किया। कुलपति प्रो. केजी सुरेश, कुलसचिव एवं विश्वविद्यालय के सदस्यों ने उनके योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।