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Sawan 2023: मुस्लिम समुदाय ने बना रखा था तबेला, ASI ने की पड़ताल तो निकला प्राचीन शिव मंदिर | Sawan 2023 Khandwa of MP Kundeshwar Mahadev Court also considered ancient this temple

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Sawan 2023: मुस्लिम समुदाय ने बना रखा था तबेला, ASI ने की पड़ताल तो निकला प्राचीन शिव मंदिर

कुंडेश्वर महादेव का मंदिर

खंडवा:सावन में मध्य प्रदेश के खंडवा में भक्ति की बयार बह रही है. यहां महादेव गढ़ के मंदिर में स्थित शिवलिंग सैकड़ों सालों से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. भक्त शिवलिंग को कुंडेश्वर महादेव के नाम से पुकारते हैं. मंदिर के पुजारियों की मानें तो यह शिवलिंग 12 वीं शताब्दी से यहां स्थित है. सावन में इस मंदिर में दिव्य अनुष्ठान जारी है. यहां तीन लाख रुद्राक्ष को अभिमंत्रित किया जा रहा है. सावन की समाप्ति पर रुद्राक्ष को भक्तों के बीच वितरित कर दिया जाएगा.

मंदिर के पुजारी पंडित अश्विन खेड़े ने कहा कि मंदिर में अखंड ओम नमः शिवाय का जाप किया जा रहा है. हालांकि, 12 वीं सदी में बना यह मंदिर समय के साथ अपना अस्तित्व खो चुका था. चट्टान में उत्कीर्ण शिवलिंग के नजदीक ही मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर भैंसों का तबेला बना रखा था. जब इस शिवलिंग के रखरखाव को लेकर मांग उठने लगी तो मोहम्मद लियाकत पवार की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका लगा दी गई.

जब मंदिर को लेकर हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका

मो लियाकत पवार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि मंदिर के नाम पर अतिक्रमण किया जा रहा है. इसे हटाया जाना चाहिए. इसके बाद पुरातत्व विभाग की ओर से इसको लेकर एक सर्वे किया गया. पुरातत्व विभाग इंदौर के तकनीकी सहायक डॉ जीपी पांडेय ने जांच के बाद 13 फरवरी वर्ष 2015 को कलेक्टर कार्यालय को इस संबंध में एक रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में शिवलिंग को प्राचीन बताया गया. रिपोर्ट में बताया गया कि यह शिवलिंग 12वीं सदी पुराना है.

शिवलिंग के पास ही नंदी की प्रतिमा स्थित है

प्राचीन मंदिर का एकमात्र खंभा आज भी मौजूद है. वहीं, शिवलिंग के कुछ हिस्सों का क्षरण हो चुका है. शिवलिंग के पास ही नंदी की प्रतिमा है, जो कि खंडित अवस्था में है. नंदी के गर्दन पर मणि माला की नक्काशी परमार काल के कलाओं का स्मरण कराता है. वहीं, पुरातत्व विभाग की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने भी माना कि मंदिर प्राचीन है.

ज्ञानवापी केस की सुनवाई के दौरान यह मंदिर चर्चा में आया

ज्ञानवापी केस में कोर्ट की सुनवाई के दौरान इस मंदिर की खूब चर्चा रही. तब सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया पर महादेव गढ़ मंदिर की फोटो और एक आर्टिकल पोस्ट कर एएसआई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाया था. उन्होंने ट्वीट किया कि जब एसआई खंडवा में शिवलिंग की जांच कर उसके ऐतिहासिक महत्व को बता सकता है तो ज्ञानवापी में क्यों नहीं?

इस शिवलिंग पर पीतल की जलाधारी चढ़ाई गई है. महादेव गढ़ मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल के नेतृत्व में यहां सालों भर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं. यहां मंदिर का पक्का निर्माण नहीं हुआ है. टेंट के नीचे ही भोलेनाथ विराजे हैं. साल 2015 से लगातार “ॐ नमः शिवाय” महामंत्र का जाप हो रहा है. हर साल शिव पार्थेश्वर का पूजन होता है . साथ ही भोले कि बारात भी निकाली जाती है.