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साधु साध्वी हमे पाप मार्ग से बचाते हुए बुरे कर्मों से मुक्ति भी दिलाते है-मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी मासा

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नव दिवसिय शाश्वती श्री नवपद औलीजी की आराधना के पाँचवे दिवस साधु पद की आराधना की गयी

झाबुआ। राकेश पोद्दार। नगर संवाददाता। परम पूज्य परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के शिष्य परम पूज्य मालवरत्न मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी महाराज साहेब मुनिश्री जीतचंद्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में नव दिवसिय शाश्वती श्री नवपद औलीजी की आराधना के पाँचवे दिवस साधु पद की आराधना की गयी। जिसमे 80 से अधिक आराधक आयंबिल तप की मंगलकारी आराधना में आज जुडे। शनिवार को पंचम दिन के अयाम्बिल करवाने के लाभार्थी श्रीमति प्यारीबाई उत्तमजी जैन परिवार थे।
इस अवसर पर आरधको को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी ने कहाँ की ‘‘आज नवपद की शाश्वत ओलीजी के पंचम दिवस साधु पद की आराधना की जाती हे। साधु पद अरिहन्त , सिद्ध , आचार्य , उपाध्याय की जन्म भूमि हे साधु बने बिना ऊपर के ये पद प्राप्त नही किये जा सकते है। साधु साध्वी 27गुणों के धारक होते है। साधु साध्वी हमे पाप मार्ग से बचाते हुए बुरे कर्मों से मुक्ति भी दिलाते है। मुनिश्री ने कहाँ की इस पद की आराधना करते हुए हमे यह भावना करनी चाहिए की मुझे भी यह साधु जीवन एक दिन प्राप्त हो जाये। आरधको ने 27 लोगस्स का जाप किया और अयम्बील तप किया। ‘‘दोपहर मे इसी के साथ 45 आगम महोत्सव का तीन दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन 16अक्टूबर दोपहर में 1ः00 बजे से 15 आगाम ग्रंथों की पूजन प्रारंभ हुई । आज के महपूजन के मुख्य लाभार्थी श्रीमती जस्सूबेन दुग्गड परिवार थे द्य और अन्य 45 लाभार्थी भी सम्मिलित हुए।
पूजन प्रारंभ करते हुए शनिवार को इस अवसर पर मुनिश्री ने कहाँ की आगम के इन ग्रंथों मे सूर्य , चन्द्र नक्षत्रों और ऋतुओ , जम्बुद्वीप,राजा श्रेणिक , अनेक धर्म कथाएँ , अनेक देवी देवताओं , चार प्रकार के शरण , समाधि मरण , पंडित मरण सन्थारा , बचपन , जवानी , बुढ़ापा अवस्था , म्रतूय केसे सुधरे , सेना सिद्धशीला का वर्णन आता है। मुनीश्री ने कहाँ ‘‘की इन ग्रंथों मे दिये विवरण का अध्ययन करने से और पूजन विधि विधान से करने पर हम हमारे जीवन मे अनेक परिवर्तन ला सकते है। चातुर्मास समिति की और से दी गयी जानाकरी के अनुसार 17 ऑक्टोबर को अंतिम दिवस शेष 15 ग्रंथ की महापूजन होगी। रविवार प्रातः 08 बजे विशेष मे अष्ट प्रकारी पूजन मे 07 वर्ष से 15 वर्ष के बच्चो के लिये कार्यक्रम रखे गये हेै। रात्रि मे 07 बजे नवकार ग्रूप की और से बच्चो के लिये विशेष शिविर आयोजित किया गया है।