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कविता- अनमोल योग

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लेखिका – चाँदनी सेठीकोचर ( दिल्ली ) युवा लेखिका

योग है, हमारे जीने

का नया रास्ता,

जो करें योग रहे स्वस्थ !

ना बढ़े मोटापा ना बढ़े मधुमेह !

आओ बहन योग करने चले !

सारी बीमारियों को

छोड़ा कर योग चले !

तुम भी चलो सीता को भी बुलाओ

क्योंकि हमारी बढ़ती उम्र की खुशियों की

एकमात्र चाबी योग  !

हम करें योग रहे तंदुरुस्त

जो ना करें योग !

वह रहे हर वक़्त अस्त

अभी तो हमें अपने

पैरो पर भागना है !

अभी तो हमें अपनी शारीरिक क्षमता

को बढ़ना है !

चलो बहन योग करने चले

छोड़ कर सारे काम

तुम भी संग चलो हमारे

हम तुम्हें जिंदगी जीने का

नया मार्ग बताते है!

डाक्टर से बनाये दूरी !

योग से बनाये नजदीकी

चलो बहन योगकरनेचले !

लेखिका – चाँदनी सेठीकोचर ( दिल्ली )

युवा लेखिका