Home Bhopal प्रधानमंत्री मोदी का ऐलान- 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को...

प्रधानमंत्री मोदी का ऐलान- 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा

26
0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की याद में रांची में संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर PM मोदी ने ऐलान किया कि आज से हर वर्ष 15 नवंबर बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

मोदी ने कहा, “मैं देश के इस निर्णय को भगवान बिरसा मुंडा और हमारे कोटि-कोटि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीरांगनाओं को समर्पित करता हूं। मैंने अपने जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा जनजाति भाई-बहनों और उनके बच्चों के साथ बिताया है। मैं उनकी जरूरतों और जिंदगी का साक्षी रहा हूं। इसलिए आज का दिन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी भावना प्रकटीकरण का एक तरह से भावुक कर देने वाला दिन है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अलग मंत्रालय का गठन किया था। मैं अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए अपने आखिरी दिन रांची की इसी जेल में बिताए थे। मुझे खुशी है कि आज आदिवासी संस्कृति से संमृद्ध झारखंड में पहला आदिवासी म्यूजियम अस्तित्व में आया। मैं इस संग्रहालय के लिए पूरे देश के जनजातीय समाज का बधाई देता हूं। ये संग्रहालय आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवंत प्रतिष्ठान बनेगा।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि साथियों इसके अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसे ही 9 और म्यूजियम पर तेजी से काम हो रहा है। इन म्यूजियम से न केवल देश की नई पीढ़ी आदिवासी इतिहास के गौरव से परिचित होगी, बल्कि इससे पर्यटन में भी बढ़ोतरी होगी। साथियों भगवान बिरसा मुंडा ने हमारे अनेकानेक आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

 

 

भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसे ही 9 और संग्रहालयों पर तेजी से काम हो रहा है। बहुत जल्द गुजरात के राजपीपला, आंध्र प्रदेश के लम्बासिंगी, छत्तीसगढ़ के रायपुर, केरल के कोझीकोड, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, तेलंगाना के हैदराबाद, मणिपुर के टमिंगलोंग, मिजोरम के कैल्सि में, गोवा के पोंडा में इन संग्राहलयों को हम साकार रूप लेते हुए देखेंगे।

 

भगवान बिरसा ने समाज के लिए जीवन जिया, अपनी संस्कृति और अपने देश के लिए अपने प्राणों का परित्याग किया।इसलिए, वो आज भी हमारी आस्था में, हमारी भावना में हमारे भगवान के रूप में उपस्थित हैं। धरती आबा बहुत लंबे समय तक इस धरती पर नहीं रहे थे।

 

लेकिन उन्होंने जीवन के छोटे से कालखंड में देश के लिए एक पूरा इतिहास लिख दिया, भारत की पीढ़ियों को दिशा दे दी।

भगवान बिरसा के नेतृत्व में मुंडा आंदोलन हो, या फिर संथाल संग्राम और खासी संग्राम हो, पूर्वोत्तर में अहोम संग्राम हो या छोटा नागपुर क्षेत्र में कोल संग्राम।

भारत के आदिवासी बेटे बेटियों ने अंग्रेजी सत्ता को हर कालखंड में चुनौती दी।