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रमजान माह की नवी तारिख को हुसैनी चैक और शहर के विभिन्न काॅलोनियों मे सजे ताजिये, समाजजनो ने पहुंचकर किए दर्शन, बागवान परिवार ने हाथ की आकृति में बनाया 12 फिट का ताजिया, शर्बत का किया वितरण

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झाबुआ।राकेश पोद्दार।नगर संवाददाता। रमजान माह की नवी तारिख को प्रतिवर्ष मुस्लिम समाज द्वारा हुसैनी चैक से होते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से निकाले जाने वाले ताजियों का जुलूस इस बार जिला प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने से समाजजनों ने नहीं निकाला। हुसैनी चैक पर ही ताजिये सजे रहे, जहां समाज के लोगों ने पहुंचकर दर्शन किए। इसके साथ ही शहर की विभिन्न मुस्लिम बस्तीयों मंे भी बनाए गए ताजियों पर समाजजनों का दर्शन, प्रसादी के लिए आना-जाना लगा रहा।
ज्ञातव्य रहे कि इस वर्ष समाजजनों द्वारा निकाले जाने वाले ताजियों के जुलूस को लेकर अससमंजस की स्थिति बनी रही। जिसका कारण कोरोनाकाल में धारा 144 लागू होने से प्रशासन से समाजजनों को तालियों का जुलूस नहीं निकालने एवं मोहर्रम के दसवे दिन राजवाड़ा पर भी जो सामूहिक रूप से ताजिये एकत्रित होते है और सैकड़ों की संख्या में हिन्दू एवं मुस्लिम दोनो संप्रदाय के लोग पहुंचकर ताजियों के दर्शन, प्रसाद चढ़ाना आर मन्नते उतारते है, उसकी भी अनुमति नहीं मिलने से इस बार मुस्लिम पंचायत की ओर से हुसैनी चैक स्थान ही नियत किया गया है। जहां मोहर्रम के दसवे दिन भी यहीं सभी ताजिये सजे रहेंगे।
इस्माईल बागवान परिवार ने बनाया 12 फिट का ताजियां
स्थानीय सिद्धेश्वर काॅलोनी में इस्माईल बागवान एवं उनके परिवारजनों में वाहिद, सरफराज बागवान आदि ने मिलकर 12 फिट ऊंचा ताजियां बनाया। यह ताजिया हाथ के पंजे पर बनाया गया है। इस्माईल बागवान ने बताया कि पिछले 35 वर्षों से उनके परिवार की ओर से ताजियां बनाया जा रहा है। मोहर्रम के नवे पर ताजिये पर विद्युत सज्जा करने के साथ समाजजनों के लिए शर्बत का आयोजन किया गया। मन्नतधारी बच्चांे को तराजू में फलों से तोलकर मन्नत पूरी की गई। वहीं युवाओं ने ताशे और नगाड़े पर या हुसैन के घोष लगाए। श्री बागवान ने बताया कि 20 अगस्त, रात्रि में यह ताजिया हुसैनी चैक पर समीर बागवान के निवास के बाहर दर्शन के लिए रखा जाएगा। बाद अगले दिन अलसुबह सभी ताजियों का विसर्जन होगा।