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COVID-19: निजामुद्दीन मरकज़ से कैसे फैला कोरोनावायरस का संक्रमण? जिसमें शामिल हुए लोगों की मौत ने देश में हड़कंप मचा दिया

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Highlight

 

  • दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका अचानक से सुर्खियों में आ गया
  • निजामुद्दीन मरकज़ में आयोजित धार्मिक सभा के बाद 24 लोग कोरोना पॉजिटिव
  • कार्यक्रम में देश-विदेश के लगभग 2000 लोग शामिल हुए थे

 

 

नई दिल्ली। दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका अचानक से सुर्खियों में आ गया है। कारण है अलमी मरकज़ बंगलेवाली मस्जिद में आयोजित एक धार्मिक सभा। इसमें देश-विदेश से लगभग 2000 लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, कई लोग विभिन्न राज्यों के लिए रवाना हो गए। उनमें से कुछ लोगों में कोविड-19 के लक्षण देखे गए हैं। 6 लोगों की मौत ने देश में हड़कंप मचा दिया। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ऐसे में इस धार्मिक सभा में हिस्सा लेने आए लोग कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच अब सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं और इन लोगों ने कम्युनिटी स्प्रेड का खतरा बढ़ा दिया है। कोरोना वायरस और मरकज मामले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक चल रही है। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन समेत अन्य अधिकारी मौजूद हैं।

अब तक 24 निकले कोरोना पॉजिटिव
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि हमारे पास सही संख्या मौजूद नहीं है, लेकिन 1500- 1700 के बीच लोग तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे। अब तक 1300 लोगों को यहां से निकाला गया है। इनमें 334 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 700 लोगों के क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है। निजामुद्दीन मरकज से विभिन्न अस्पतालों में लाए लोगों में 24 पॉजिटिव निकले हैं। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तब्लीगी जमात का नेतृत्व करने के लिए एक मौलाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। निजामुद्दीन मरकज वाले इलाके को सील कर दिया गया है। इनके संपर्क में आए लोगों को पुलिस तलाश रही है।

तेलंगाना में 6 की मौत
निज़ामुद्दीन की मरकज़ से अंडमान पहुंचे 9 लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गये हैं। वहीं इन्हीं में एक मरीज़ की पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। तेलंगाना में उन छह लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मौत हो गई धार्मिक सभा में शामिल हुए थे। धार्मिल सभा में शामिल होने के बाद तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर पहुंचे कुछ लोगों में भी कोरोनावायरस के लक्षण पाए गए हैं। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में एक 65 वर्षिय व्यक्ति की कोरोनावायरस से मौत भी हो गई।

इस्लाम की शिक्षा के लिए की गई थी स्थापना
बता दें कि तब्लीगी जमात की स्थापना 1926-27 में की गई थी। दरअसल, मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम कबूल कर लिया था। मुगल काल के बाद जब अंग्रेज देश में आए तो आर्य समाज ने फिर उन लोगों का शुद्धिकरण कर उन्हें हिन्दू धर्म में प्रवेश कराने की शुरूआत की। ऐसे में मुसलमानों के बीच इस्लाम की शिक्षा देने के लिए मौलाना इलियास कांधलवी ने निजामुद्दीन में स्थित मस्जिद में तबलीगी जमात की स्थापना की। तब्लीगी जमात के मुख्य रूप से 6 उद्देश्य है। ये कलिमा (अल्लाह को एक मानना), सलात (नमाज), इल्म (शिक्षा), इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तब्लीग है।

दिल्ली पुलिस ने भेजा था नोटिस
बता दें कि तब्लीगी जमात का कार्यक्रम 1 मार्च से 15 मार्च के बीच आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के बाद भी विदेशों से आए कई लोग यहां रुके हुए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन्हें 23 और 28 मार्च को नोटिस दिया गया था। साथ ही आग्रह किया था कि कोरोना महामारी फैली है, इसलिए भीड़ को एकत्रित न होने दें, लेकिन इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। जमात के मौलाना यूसुफ ने सफाई देते हुए ककहा है कि लॉकडाउन लागू होने से पहले ही वहां पर देशी विदेशी गेस्ट ठहरे हुए थे। लिहाजा उन्होंने सरकार के आदेश का पालन किया कि जो जहां है, वहीं पर ठहरा रहे।

कहा हुई चूक?
तब्लीगी जमात ईवेंट लॉकडाउन होने के बाद ही बंद किया गया। इससे पहले, अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशियों की कोरोनावायरस को लेकर कोई स्केनिंग नहीं की गई। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अन्य राज्यों में गए लोगों के बीमार पड़ने के बाद भी खतरे की घंटी नहीं बजाई गई। क्षेत्र के निवासियों को स्कैन करने के लिए कोई चिकित्सा शिविर नहीं लगाया गया।