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मेरी बेटी कोविड वार्ड में डॉक्टर थी, मैं जानता हूं थाली और ताली से कितना हौंसला बढ़ता था: स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया

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नई दिल्ली: स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में कोविड-19 महामारी को लेकर राजनीति करने और आंकड़े छिपाने के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि महामारी को लेकर कभी राजनीति नहीं की। कोविड से हुयी मौत राज्य दर्ज करते हैं, केंद्र सरकार ने कभी किसी राज्य को कम मामले दर्ज करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार का मंत्री हूं उससे पहले मैं एक बेटी का बाप हूं, और मेरी बेटी जब कोविड क्राइसिस में डॉक्टर के तौर पर काम कर रही थी वो कोविड वॉर्ड में काम कर रही थी, उसके बाद उसके माता और पिता की क्या स्थिति होती है। मेरी बेटी ने कहा था कि मैं कोविड वार्ड में ही काम करती रहूंगी, तब मुझे महसूस हूथा कि ताली और थाली का क्या महत्व था, हमारा हौंसला बढ़ता था।”

मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में कहा, “थाली और ताली कोरोना वारियर्स को प्रोत्साहित करने के लिए बजाई, जो रोड पर देश की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी खड़ा था उसके उत्साह के लिए बजाई। कई सदस्यों ने बोला की भारत सरकार मृत्यु दर का आँकड़ा छुपा रही है, भारत सरकार वही आँकड़ा पब्लिश करती है जो राज्य सरकार देती है। सरकार ने किसी को नहीं कहा है की आँकड़ा कम दीजिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदुस्तान जैसा देश किसी के भरोसे नहीं बैठ सकता, इसलिए प्रधानमंत्री ने बायो टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट व वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि तुरंत वैक्सीन पर काम किया जाए। 123 देशों को भारत ने मेडिसन सप्लाई किया था, उसमें से 64 देशों ने भारत का धन्यवाद किया था, इसलिए जब दूसरी लहर चल रही थी और हमारे यहां बहुत जरूरत दवाओं की पड़ गई थी, उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंदुस्तान ने हमें तुरंत सहायता की थी उसको हम भूल नहीं सकते।”

इससे पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि विपक्ष कोविड-19 महामारी के प्रबंधन को लेकर गलत विमर्श बनाने की कोशिश कर रहा है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्री पुरी ने देश में कोविड-19 महामारी का प्रबंधन, वैक्सीनेशन का कार्यान्वयन और संभावित तीसरी लहर को देखते हुए नीति और चुनौतियां विषय पर उच्च सदन में अल्पकालिक चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि हमारा शत्रु कोरोना वासरस है, न कि सरकार या किसी राज्य के मुख्यमंत्री। उन्होंने कहा कि सदन में इस विषय पर चर्चा के दौरान गलत विमर्श बनाने की कोशिश की गयी और सरकार पर गलत आरोप लगाए गए।