Home Bhopal MP Election: ‘मामा’ की इमेज के साथ शिवराज सिंह चौहान पर फिर...

MP Election: ‘मामा’ की इमेज के साथ शिवराज सिंह चौहान पर फिर दांव लगाएगी BJP! | mp election image of mama BJP will bet on face of cm shivraj singh chouhan madhya pradesh

5
0
MP Election:

2018 में, कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, जो 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से दो कम थी. वहीं बीजेपी 109 सीटों के साथ मामूली सीटों के अंतर से पीछे थी, लेकिन कांग्रेस के 40.89 प्रतिशत के मुकाबले 41.02 प्रतिशत बड़ा वोट शेयर हासिल किया था. (आनंद प्रकाश की रिपोर्ट के आधार पर)

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. (फाइल फोटो)

भोपाल: इस साल के अंत में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है. पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को पटखनी दे दी थी. हालांकि बाद में आंकड़ों के खेल में बीजेपी ने दोबारा सरकार बना ली. लेकिन अब एक बार फिर गेंद जनता के पाले में है, ऐसे में जमीन पर मजबूत होना जरुरी है. वहीं बीजेपी ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी तैयारी जमीन पर शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार शिवराज सिंह चौहान ही एक बार फिर पार्टी के सीएम पद के उम्मीदवार होंगे. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह के चेहरे पर बीजेपी चुनाव लड़ेगी.

हालांकि 2019 में कांग्रेस के हाथों पार्टी की हार को देखते हुए मध्य प्रदेश में चार बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि को बदलने की योजना बीजेपी के रणनीतिकारों ने बनाई है. सीएम शिवराज चौहान को अपने नए व्यक्तित्व पर पुनर्विचार करने की स्वतंत्रता दी गई है. मुख्यमंत्री, जिन्हें प्यार से “मामा” (मामा) कहा जाता है, विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासियों और दलितों के बीच अपनी विनम्र और समावेशी छवि बनाए रखेंगे.

शिवराज चौहान के मंत्रिमंडल का विस्तार

सूत्रों ने बताया कि कानून और व्यवस्था के बढ़ते मामलों और उनकी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए सीएम शिवराज चौहान एक सख्त प्रशासक के रूप में सामने आने की योजना बना रहे हैं. साथ ही नई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से भी पार्टी को मजबूती मिलेगी. वहीं अंत में शिवराज चौहान के मंत्रिमंडल का विस्तार भी होगा. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार को हरी झंडी दे दी है. कई मौजूदा विधायकों को भी दूसरे आजमाए और परखे हुए फार्मूले के तहत हटा दिया जाएगा.

ये भी पढ़ें



ये भी पढ़ें: MP में कुल कितने बेरोजगार युवा? कांग्रेस के सवाल पर शिवराज सरकार ने दिया ये जवाब

लोकसभा चुनावों के परिणामों पर नजर

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी राज्य में अपने जमीनी स्तर के संगठन के बल पर जनता में पैठ बढ़ा रही है. पार्टी 65,000 बूथ समितियों में से 62,000 का डिजिटल सत्यापन पहले ही कर चुकी है. समितियों को मतदाता आउटरीच कार्यक्रम शुरू करने के लिए कहा गया है. प्रत्येक बूथ समिति को उसकी मतदाता सूची और पिछले दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण दिया गया.

योजनाओं के लाभार्थियों की सूची

इसके अलावा, उन्हें राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की सूची भी सौंपी गई है, जिनसे संपर्क किया जाना है. सूत्रों ने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए करेगी. जैसे लाड़ली बहना योजना के फॉर्म भरवाएंगे, जिससे लोगों से सीधा संपर्क मजबूत होगा.

ये भी पढ़ें: भोपाल गैस त्रासदी: 38 साल बाद भी संघर्ष कर रहीं जिंदगियां, मुआवजा नहीं तो इलाज की करा दें; पीड़ितों की मांग

क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों की पहचान

कार्यकर्ताओं से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बूथ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से अगले छह महीनों में राज्य को क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर विचार और प्रतिक्रिया लेंगे. इसमें सूक्ष्म स्तर के बदलाव शामिल होंगे, जैसे किसी की पक्के घर या शौचालय की जरूरत. प्रत्येक बूथ कमेटी को कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों की पहचान कर उनसे संपर्क करें जो मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं.

कृषि और सड़क क्षेत्र की उपलब्धियों पर ध्यान

पार्टी कार्यकर्ताओं को लामबंद करने और लाडली बहना जैसी आदिवासी कल्याण और महिला-उन्मुख योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है. कृषि और सड़क क्षेत्रों में उपलब्धियों पर भी काफी ध्यान दिया गया है. शिवराज चौहान, जो 2018 की हार के बाद 16 महीने तक सत्ता से बाहर रहे, दो साल बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके प्रति वफादार 20 से अधिक विधायकों के दलबदल के साथ सत्ता में लौटे थे.

ये भी पढ़ें: जैसे गुजरात में शेर की मांद में घुसकर ललकारा, वैसे ही मध्य प्रदेश की सभी सीटों पर लड़ेगी AAP: केजरीवाल

कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी

2018 में, कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, जो 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से दो कम थी. वहीं बीजेपी 109 सीटों के साथ मामूली सीटों के अंतर से पीछे थी, लेकिन कांग्रेस के 40.89 प्रतिशत के मुकाबले 41.02 प्रतिशत बड़ा वोट शेयर हासिल किया था.

प्रदेश में गुटबाजी खत्म करने पर जोर होगा

वहीं, इस बार बीजेपी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी. जिसमें मतदाताओं को कृषि और सड़क क्षेत्र में उपलब्धियों को प्रमुखता से गिनाया जाएगा. इस दौरान मध्य प्रदेश में गुटबाजी खत्म करने पर खास तौर पर विशेष जोर होगा. टिकट बंटवारे में जीतने की क्षमता महत्वपूर्ण पैमाना होगा. ऐसे में कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं, साथ ही नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट नहीं दिए जाएंगे.

फिलहाल, कांग्रेस से कई विधायकों पर बीजेपी का नजर लगी हुई है, जिसमें बीजेपी कांग्रेस के मजबूत और साफ छवि के विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश करेगी.