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मध्य प्रदेश में विधानसभा की 24 सीटों के उपचुनाव: पहली बार जीते 10 पूर्व विधायकों की राह होगी मुश्किल

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मध्य प्रदेश में विधानसभा की 24 सीटों के उपचुनाव के लिए अभी तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। जिन सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें 10 ऐसे क्षेत्र हैं जहां के विधायक पहली बार कांग्रेस से जीते। लेकिन, इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल हो गए।

जीतने के महज 15 माह के भीतर ही दल बदलने से उनके सामने कई चुनौतियां हैं। वैसे इन क्षेत्रों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए राह आसान नहीं होगी। भाजपा ने कमोबेश अपनी गाइडलाइन साफ कर दी है कि इस्तीफा देकर पार्टी में शामिल होने वाले कांग्रेस के बागी विधायकों पर ही वह दांव लगाएगी।

2018 के विधानसभा चुनाव में अंबाह, अशोकनगर, करैरा, ग्वालियर पूर्व, दिमनी, पोहरी, भांडेर, मुरैना, मेहगांव और हाटपिपल्या में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार जीते विधायक अब भाजपा में हैं। इन दस क्षेत्रों में ज्यादातर सीटों पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही है। कांग्रेस के बागियों के आने से 2018 के भाजपा उम्मीदवार अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह को हराकर मुरैना में रघुराज सिंह कंषाना पहली बार कांग्रेस से जीते थे।
गुर्जर समाज के बड़े नेता रुस्तम सिंह ने अभी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है, लेकिन उनके समर्थक कंषाना के साथ दिल से जुड़ नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस के सामने भी मुश्किल दूसरी तरफ कांग्रेस की मुश्किल यह है कि 2018 के उनके मजबूत स्तंभ अब भाजपा में चले गए हैं। ऐसे में उनके सामने उम्मीदवारों का टोटा है और अब उनकी निगाह भाजपा के ही असंतुष्टों पर टिक गई है। अगर कांग्रेस ने भाजपा के पुराने उम्मीदवारों पर दांव लगा दिया तो लड़ाई रोमांचक हो जाएगी। फिर चेहरे वही हो सकते हैं, लेकिन सिंबल बदला रहेगा।

निर्दलीय और बसपा ने भी दी थी टक्कर

बानगी के तौर पर अंबाह सीट पर 2018 में कांग्रेस से लड़ रहे कमलेश जाटव निर्दलीय नेहा किन्नर से करीब साढ़े सात हजार मतों से जीते। इसी तरह पोहरी में पहली बार सुरेश धाकड़ भी बसपा के कैलाश कुशवाहा से 7918 मतों से कड़ी मशक्कत के बाद जीत सके थे। इन क्षेत्रों में भाजपा तीसरे नंबर पर थी। अब अंबाह और पोहरी में भाजपा के लिए लड़ाई आसान नहीं रहेगी, लेकिन कांग्रेस के लिए मुश्किल और भी बड़ी होगी।

सिंधिया पर भाजपा को सर्वाधिक भरोसा

भाजपा को उपचुनाव में विजय हासिल करने में सर्वाधिक भरोसा पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर है। सिंधिया के प्रभाव में ही चंबल-ग्वालियर की अधिकांश सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। अब वह भाजपा में हैं और उनके लिए यह प्रतिष्ठापरक भी है। उधर, कांग्रेस भी भाजपा को शिकस्त देने के लिए सारे समीकरण आजमा रही है।

पहली बार जीतने वालों की स्थिति

सीट – विजयी उम्मीदवार – निकटतम प्रतिद्वंद्वी – मतों का अंतर

अंबाह – कमलेश जाटव – नेहा किन्नर – 7547

अशोक नगर – जजपाल सिंह जज्जी – डूडूराम कोरी – 9730

करैरा – जसमंत जाटव – राजकुमार ओमप्रकाश – 14824

ग्वालियर पूर्व – मुन्ना लाल गोयल – सतीश सिकरवार – 17819

दिमनी – गिर्राज डंडौतिया – शिवमंगल सिंह तोमर – 18477

पोहरी – सुरेश धाकड़ – कैलाश कुशवाहा- 7918
भांडेर – रक्षा सरौनिया – रजनी प्रजापति – 39896

मुरैना – रघुराज सिंह कंषाना – रुस्तम सिंह- 20849

मेहगांव – ओपीएस भदौरिया – राकेश शुक्ला – 25814

हाटपिपल्या – मनोज चौधरी – दीपक जोशी – 13519