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लॉकडाउन 3.0: उद्योगों की विद्युत समयस्याओं पर बिजली कंपनी सीएमडी के साथ बैठक

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न्युनतम शुल्क, बिजली बिलों में छुट सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा

 

इंदौर। देश व्यापी लॉकडाउन के बाद उद्योगों की सबसे बडी समस्या बकाया टैक्स और विद्युत बिल भरने की है। लघु सुक्ष्म और मध्यम उद्योगों के सामने अपने बकाया बिल के साथ बिजली बिलों की न्युनतम राशि भरने की है। जो लॉकडाउन के दौरान उत्पादन ठप्प होने के बाद भी बिल का भुगतान करना होगा। वही अन्य राज्यों में उद्योंगो को राहत देने के लिए बिजली बिल में अगले तीन महीने न्यूनतम चार्ज नहीं लेने,  अगले तीन माह का बिल का भुगतान जुलाई माह में बिना किसी पेनल्टी अथवा ब्याज के जमा करने की राहत और . इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी अगले पाँच साल के लिए माफ़ करने की पहल की है। इस संबध में सोमवार को विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधी मप्र पश्चिचम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी श्री विकास नरवाल से मिले। इस दौरान उद्योगों के हित में चर्चा करते हुए अनेक मांग और सुझाव दिए गए। विद्युत कंपनी मुख्यालय में हुई इस बैठक में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए चर्चा की गई।

प्रदेश में उद्योगों को बिजली के बिल भरना बडी आर्थिक समस्या के रूप में सामने आ रहा है। लोड के अनुसार आने वाले न्युनतम बिल लॉक डाउन के दौरान लाखों की राशि के हो गए है। ऐसे में बिना राहत पैकेज के उद्योगों का संचालन मुश्किल होगा। सोमवार को मप्र पश्चिचम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मुख्यालय में लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष महेश गुप्ता, इंडियन प्लास्टपैक फोरम के अध्यक्ष सचिन बंसल, लघु उद्योग भारती के मालवा संभाग सचिव विनित जैन, जिला अध्यक्ष धनंजय चिंचालकर सहित अन्य संगठन के प्रतिनिधी विद्युत वितरण कंपनी के एमडी विकास नरवाल से मिले। इस दौरान बताया गया कि वर्तमान में उद्योग- व्यापार की हालत चिंताजनक है और उद्योगपति आर्थिक रूप से कमजोर । ऐसे में औद्योगिक जगत को शासन-प्रशासन और विभागों के सहयोग अपेक्षित है। इससे उद्योग कारखानें एकबार फिर से प्रारंभ किए जा सकेगें। इस दौरान मांग और सुझाव प्रतिवेदन दिया गया। इसमें  प्रदेश ऊर्जा विभाग ने विद्युत उपभोक्ताओं को दिनांक 15 मई या इसके पूर्व तक देय होने वाले सभी देयकों की भुगतान तिथी विस्तारित को आगे बढाने की मांग की गई। साथ ही  सभी उपभोक्ताओं के बिलों में जुडने वाली स्थाई न्यूनतम राशि को माफ करने की मांग की गई। प्रदेश के सभी निम्न दाब गैर घरेलू  एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं एवं उच्चदाब  टैरिफ एचटी उपभोक्ताओं से माह अप्रैल 2020 के देयकों के लिए उनकी संविदा मांग पर लगने वाले स्थाई प्रभार फिक्स चार्ज की वसूली को माफ करने की  मांग की गई।

वर्तमान आपात परिस्थितियों को देखते हुए उपभोक्ताओं से केवल वास्तविक खपत का बिल जारी करने और नियत प्रभार एवं न्यूनतम चार्जेस से उन्हें जब तक ऐसी स्थिति रहती है मुक्त रखें का सुझाव दिया गया। प्रतिनिधी मंडल ने बताया कि ऐसा नही होने की स्थिती में अनेकों उद्योग बिलो का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे एवं उद्योगों को स्थाई रूप से बंद करने की स्थिति भी निर्मित हो सकती है। उद्योग कारखानों में स्थापित विद्युत कनेक्शन के लिए विद्युत वितरण कंपिनयों द्वारा लिया जाने वाला न्यूनतम शुल्क नहीं लिए जाना उचित होगा। प्रतिनिधी मंडल ने बताया कि  हमारी जानकारी में आया है कि अन्य राज्यों की सरकारों एवं विद्युत नियामक आयोग द्वारा निम्नलिखित तीन छूट प्रदान की गई है। हम अपेक्षा करते है कि मप्र शासन भी उद्योग हित में इस दिशा में कार्य करेगा। इसमें. बिजली बिल में अगले तीन महीने न्यूनतम चार्ज नहीं लगाया जाएगा। अगले तीन माह का बिल का भुगतान जुलाई माह में लिया जाएगा। बिना किसी पेनल्टी अथवा ब्याज के भरने की छूट देने और  इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी अगले पाँच साल के लिए माफ़ की जाने जैस मुद्दे शामिल है।

इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष सचिन बंसल ने कहा कि हम इस बात की सराहना करते हैं कि जहां राज्य सरकार को उद्योग का समर्थन करने की उम्मीद है, उसे धन की भी आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसी योजना बना सकती है, जिसमें 30.06.2020 से पहले / पहले करों / कर्तव्यों / शुल्क का भुगतान करने वालों को 9 माह के बराबर राशि का भुगतान किया जा सकता है, जिसे पूर्ण वर्ष भुगतान माना जाता है। यह जीएसटी आदि जैसे लेनदेन आधारित कर को छोड़कर सभी करों के लिए लागू हो सकता है। इससे पहले भुगतान किए गए वर्ष के लिए सभी करों पर एक साधारण 25% फ्लैट छूट देने पर आर्थिक रूप से सक्षम इकाइयां अग्रिम भुगतान कर सकती हैं और सरकार को अग्रिम रूप से धन भी मिलेगा।