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मप्र मानव अधिकार आयोग ने सात मामलों में लिया संज्ञान…सिस्टम ने ही गहरा आघात दे दिया

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भोपाल : मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने आज मानव अधिकार हनन से जुड़े सात मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है।

कोरोनाकाल में जान गवां चुके शिक्षकों के परिवारों को बच्चों की शिक्षा के साथ परिवार चलाना हो रहा मुश्किल

कोरोना पाॅजिटिव थे पापा, बेटी के हाथ पीले करने का सपना अधूरा रह गया
मुरैना में कोरोना की जंग हार चुके शिक्षक गोपाल शर्मा की मौत से उनका अपनी बिटिया के हाथ पीले करने का सपना अधूरा रह गया। गोपाल शर्मा कहते थे – प्रियंका की डिग्री पूरी हो जाये तो हाथ पीले कर देंगे। गोपाल शर्मा की गृहस्थी अभी कच्ची थी, क्योंकि बच्चे पढाई कर रहे थे। इनके असमय जाने से परिवार टूट गया है। मामले में आयोग ने कमिश्नर, चंबल संभाग, मुरैना से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है।

 

रीवा में शिक्षक पति के साथ सास-ससुर की भी मौत, छह माह का बेटा अनाथ

रीवा में कोरोना महामारी से महज 10 दिन के भीतर शिक्षिका प्रवीणा कुमारी के शिक्षक पति के साथ सास-ससुर की भी मौत हो गई। इन गहरे जख्मों के बीच उनकी गोद में छह माह का बेटा बचा है, जो अब पिता के साये से वंचित होकर अनाथ हो गया है। मामले में आयोग ने कमिश्नर, रीवा संभाग, रीवा से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है।

सिस्टम ने ही गहरा आघात दे दिया

उज्जैन जिले के रामेश्वर डाबी घटिया ब्लाॅक के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। इनके तीन बच्चे पढ रहे है। परिवार में मां तीन बच्चों और सास के साथ उज्जैन की घटिया तहसील के ग्राम डाबरी में रहते हैं। रामेश्वर कोरोना पाॅजिटिव थे, लेकिन उनके मृत्यु प्रमाण पत्र में लिखा है कि इनकी मृत्यु हाॅर्ट अटैक से हुई है। इससे परिवार के साथ अस्पताल वालों की ओर से अन्याय किया गया। परिवार में किसी को भी अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। परिवार पर भारी आर्थिक बोझ आन पडा है। मामले में आयोग ने कमिश्नर, उज्जैन संभाग, उज्जैन से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है।

4474 गैस पीडित कल्याणियों को 18 महीने से नहीं मिली पेंशन

भोपाल शहर की करीब साढे चार हजार गैस पीडित कल्याणी महिलाओं को बीत 18 माहों से पंेशन नहीं मिली है। इसे लेकर गैस पीडित कल्याणी महिलाएं कई बार धरना प्रदर्शन कर विभागीय मंत्री और अफसरों को ज्ञापन दे चुकी है। उन्हें हर बार पेंशन शुरू करने का आश्वासन देकर चलता कर दिया जाता है। गैस पीडित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष का इस मामले में कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिसम्बर 2020 में पेंशन शुरू करने को लेकर की गई घोषणा पर अफसरों ने आजतक अमल नहीं किया है। इन महिलाओं के जीवन यापन का एक मात्र सहारा ये पेंशन ही है। लेकिन प्रदेश सरकार न उसे भी छीन लिया है। मामले में आयोग ने संचालक, संचालनालय गैस राहत एवं पुनर्वास, भोपाल से 10 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है।
दो माह से पोषण आहार नहीं बंटा, दो साल की बच्ची का वजन 4.70 किलो

शिवपुरी जिले की एकीकृत बाल विकास परियोजना क्षेत्र पोहरी के मडखेडा गांव में पिछले दो महीने से पोषण आहार नहीं बांटा गया है। अति कुपोषित हालत में दो साल की रजनी पुत्री राकेश आदिवासी को जिला अस्पताल शिवपुरी के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया है। बच्ची के पिता का कहना है कि जिला अस्पताल में जब भर्ती किया उस दिन बच्ची का वजन मात्र 4 किलो 700 ग्राम था। जबकि दो साल की उम्र में किसी सामान्य बच्चे का वजन 8 से 10 किलो ग्राम रहना ही चाहिये। मामले में आयोग ने कमिश्नर, ग्वालियर संभाग, ग्वालियर, कलेक्टर शिवपुरी तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, शिवपुरी से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने यह भी कहा है कि पोषण आहार वितरण में हुये विलम्ब के संबंध में स्पष्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाये।

बीस फीट नीचे कुएं में उतरकर पानी लाती हैं गांव की बेटियां

बैतूल जिले की भैंसदेही जनपद पंचायत क्षेत्र के खामला के पोषक ग्राम बोरखेडी में पानी की समस्या विकराल हो गई है। यहां गांव की लडकियां अपनी जान जोखिम में डालकर एक बीस फीट गहरे कुएं में उतरकर पीने का पानी निकालने को मजबूर हो रही है। गांव की नदी तालाब सूख चुके हैं और दिनों दिन गिरते जल स्तर की वजह से कुएं का पानी भी पाताल में पहुंच चुका है। ग्राम पंचायत की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को इस तरह जान जोखिम में डालकर पानी लाना पड रहा है। मामले में आयोग ने कलेक्टर, बैतूल से जांच कराकर संबंधित व्यक्तियों को प्राप्त उपयोग योग्य एवं स्वच्छ पेयजल के मौलिक/मानव अधिकारों की सुरक्षा करते हुये पानी की उचित व्यवस्था कर की गई कार्यवाही का 15 दिवस में प्रतिवेदन मांगा है।

 

इन्दौर में सिर्फ दो दिन में मृत्यु प्रमाण पत्र में सुधार के लिये पहुंचे 200 लोग

 

इन्दौर नगर निगम द्वारा कोरोना से शिकार बने लोगों की संख्या लगातार छिपाई जा रही है। खुलासा तब हुआ, जब अनलाॅक के बाद दो दिन में ही मृत्यु प्रमाण पत्र में सुधार का आवेदन लेकर लोगों की भीड पहुंचने लगी। घंटों लगी लाईन के बावजूद अधिकारी सिर्फ 25-30 लोगों का आवेदन आने की बात कहते रहे। एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र में इस संबंध में प्रकाशित समाचार में दिये गये तथ्यों पर आयोग द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है।

 

इस मामले में आयोग ने प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मंत्रालय, प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय, आयुक्त/संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल, कमिश्नर, इंदौर, संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर तथा आयुक्त, नगर निगम, इंदौर से दो सप्ताह में निम्न बिन्दुओं पर प्रतिवेदन मांगा है:-

 

(1) कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति की, इसके परिणाम स्वरूप हुई, मृत्यु के संबंध में किस प्रकार से चिकित्सकीय अभिलेख संधारित किया जाता है ?

(2) क्या कोविड-19 के संक्रमण के परिणाम स्वरूप हुई मृत्यु के संबंध में ऐसे मृत व्यक्ति के चिकित्सा अभिलेख में अंततः उसकी मृत्यु इसके परिणामस्वरूप होने का उल्लेख संबंधित चिकित्सकों द्वारा किया जाता है ?

(3) क्या कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसका शव परीक्षण कराते हुए उसकी मृत्यु के कारण को स्पष्ट कराया जाता है अथवा कोविड-19 संक्रमण से हुई मृत्यु के कारण शव परीक्षण कराये बिना इसी आधार पर उसकी मृत्यु को मान्य किया जाता है ?

(4) नगर निगम इंदौर से जारी किये जाने वाले मृत्यु प्रमाण पत्रों में व्यक्ति की मृत्यु का कारण कोविड-19 के संक्रमण के परिणाम स्वरूप होने का उल्लेख न किया जाना बताया गया है, तो ऐसी स्थिति में कोविड-19 के संक्रमण से हुई मृत्यु से संबंधित व्यक्ति के उत्तराधिकारियों को इस कारण केन्द्र अथवा मध्यप्रदेश शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्रता अनुसार लाभ किस प्रकार से प्राप्त हो सकेगें ?

(5) क्या ऐसे मृतक के उत्तराधिकारियों को नगर निगम इंदौर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के बाद मृत्यु के कारण के संबंध अलग से स्वास्थ्य विभाग से कोई प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत करना आवश्यक है ?

(6) कोविड-19 संक्रमण के परिणाम स्वरूप होने वाली मृत्यु के उपरांत इन्दौर शहर में प्रकट हुई उपरोक्त समस्याओं के कारण मृतक के परिजन/उत्तराधिकारियों को हो रही असुविधा के उचित समाधान के लिए क्या व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ?

(7) इसी प्रकार की परिस्थितियाँ इंदौर शहर के अलावा मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी उत्पन्न होना स्वाभाविक है और इस पर समग्र रूप से प्रदेश स्तर पर स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा ही स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जाना आवश्यक है, जिससे पूरे मध्यप्रदेश में इस संबंध में समान प्रक्रिया का पालन हो सके और सभी संबंधित हितग्राहियों को हो रही असुविधा का समाधान सुनिश्चित करते हुए उनके तत्संबंधी मौलिक/मानव अधिकारों का उचित संरक्षण किया जा सके।