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मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान…छिंदवाड़ा से ब्लैक फंगस के रैफर मरीज को भर्ती करने से किया इंकार

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भोपाल: मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रथम दृष्टया मानव अधिकार हनन से जुड़े मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा गया है।

 

ब्लैक फंगस के रैफर मरीज को भर्ती करने से किया इंकार

 

छिंदवाड़ा से रैफर होकर आये ब्लैक फंगस के मरीज को एम्स, भोपाल के डॉक्टरों ने बैड खाली न होने का बोलकर ०७ घण्टे तक भर्ती नहीं किया। मरीज के परिजन हमीदिया लेकर पहुचे किंतु वहॉ भी बैड न मिलने से वापस एम्स ले आये। गौरतलब है कि छिदवाडा निवासी घनश्याम बॉक्सर उम्र ४५ वर्ष जो कि वन विभाग में क्लर्क है उन्हे विगत २२ मार्च को कोरोना वैक्सीन लगी थी तथा २८ मार्च को बुखार आने एवं फिर १२ अप्रैल को पैरालिसिस का अटैक आने के साथ ही उनकी बायी ऑख में सूजन आयी तो स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हे ब्लैक फंगस का संक्रमण बताकर रैफर कर दिया। रैफर मरीज ०७ घण्टे तक भटकता रहा किन्तु एम्स भोपाल ने उसे भर्ती नहीं किया।

आयोग ने उक्त मामले में कमिश्नर भोपाल संभाग, भोपाल एवं संचालक स्वास्थ्य सेवायें, संचालनालय भोपाल से १० दिवस में निम्न बिन्दुओं पर प्रतिवेदन तलब किया है कि-

१. मरीज को किन परिस्थियों में भर्ती नहीं किया जा सका।

२. क्या मरीज के इलाज की कोई व्यवस्था हो सकी है।

३. यदि छिदवाड़ा मेडिकल कॉलेज में ऐसी बीमारी का ईलाज संभव है तो उसे भोपाल क्यों रैफर किया गया ?

 

गॉव के सभी पेयजल स्रोत सूखे

 

सिहोर जिले के आदिवासी बाहुल्य गॉव जामली में इस समय पेयजल के सभी स्रोत सूख जाने के कारण ग्रामीण जन ३-४ किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिये मजबूर हैं। करीब ३००० की आबादी वाले इस गॉव में पेयजल की व्यवस्था न होने से गा्रमीण जन पानी के लिये इधर उधर भटकने के लिये मजबूर हैं। यहॉ तक की ग्राम पंचायत का टैंकर भी कंडम हालत में पड़ा हुआ है। यही हालात ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गॉव सुआखेड़ा, मोयापानी, वालूपाट, नादिया सहित अन्य आदिवासी टोला मजरो के आदिवासियों को भीषण जल संकट से गुजरना पड़ रहा है।

आयोग ने इस मामले में कलेक्टर सिहोर से जॉच कर पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कर प्रतिवेदन १० दिवस के अंदर भेजने के निर्देश दिये है।

 

कैदी की मृत्यु

 

केन्द्रीय जेल उज्जैन ने निरूद्ध बंदी शिवजीराम पिता रामरतन उम्र ६५ वर्ष की ईलाज के दौरान मृत्यु हो जाने के मामले में आयोग ने निर्देश दिये है कि उक्त मामले में निर्धारित/नियमानुसार/निर्देशानुसार प्रतिवेदन आयोग को प्रेषित किया जाये तथा यह प्रकरण आयोग की दो सदस्यीय खण्डपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाये।

 

लिफ्ट में १२ घण्टे फसी महिला कर्मचारी

 

भोपाल के हमीदिया अस्पताल की एक लिफ्ट में अस्पताल की ही महिला कर्मचारी १२ घण्टे तक लिफ्ट में फसी रही। रात भर खोजते परिजन जब अस्पताल पहुचे तो लिफ्ट से महिला की आवाज सुनी वह अर्धमुक्षित अवस्था में पायी गई। इस मामले में आयोग ने अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल भोपाल को फैक्स एवं ई-मेल से नोटिस भेजकर प्रतिवेदन तलब करते हुये जानना चाहा है कि पीडित महिला के स्वास्थ्य की स्थिति क्या है ? प्रतिवेदन ०७ दिवस में मगाया गया है।

 

इस्तेमाल की गई पीपीई किट दोबारा बेची जा रही

 

सतना के बड़खेरा स्थित बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में इस्तेमाल पीपीई किट को धोकर पुनः पैक कर बाजार में बेचे जाने की घटना का विडियो वायरल होने से हडकंप मच गया। कोरोना गाईडलाईन के मुताबिक ईलाज में इस्तेमाल समस्त सामग्री जैसे पीपीई किट, ग्लाव्स, मास्क इत्यादि वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किये जाने चाहिये।

आयोग ने संचालक, मध्य पद्रेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल तथा कलेक्टर, सतना से जॉच की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन १५ दिवस में तलब किया है।

 

 

बच्चों से मारपीट एवं बंधक रखने का मामला

 

छतरपुर जिले के खजुराहो से लगभग ०७ किलोमीटर दूर स्थित गॉव बंदरगढ़ में दबंगो के खेतो में काम करने से मना करने पर बैजनाथ अहिरवार व उसके छोटे भाई से मारपीट होने से दोनो गॉव छोड़कर भाग गये। तब दबंगों ने उसके घर में घुसकर गर्भवती पत्नी के सामने ही उसके बच्चों से बेरहमी से मारपीट करने तथा चार दिनों तक घर में ही बंधक बनाकर धमकी देने के प्रकरण में आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक सागर को फैक्स से नोटिस भेजकर १५ दिवस में जॉच प्रतिवेदन तलब किया है।

 

जबरन ले जा रहे कोविड सेंटर

 

इन्दौर नगर निगम द्वारा चलाये जा रहे घर-घर मरीज संग्रहण के अंतर्गत विगत दो दिन में ही २७७ लोगों को होम आईसोलेशन से राधास्वामी कोविड केयर सेंटर भेजा जा रहा है। जिनके घरों में आईसोलेशन की व्यवस्था है उन्हें भी निकालकर कोविड केयर सेंटर भेजा जा रहा है। यहॉ तक कि कोविड के लक्षण न होने वाले लोगों को भी जबरदस्ती धमकाकर तथा पुलिस का डर दिखाकर कोविड केयर सेंटर भेजे जाने के मामले में आयोग ने कमिश्नर इन्दौर संभाग इन्दौर तथा आयुक्त नगर निगम इन्दौर से एक सप्ताह में प्रतिवेदन मॉगा है।