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SC की ऑडिट कमेटी की आई रिपोर्ट: केजरीवाल सरकार ने जरूरत से 4 गुना ज्यादा मांगी ऑक्सीजन

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  • SC की ऑडिट कमेटी की आई रिपोर्ट
  • ऑक्सीजन किल्लत को लेकर घिरी दिल्ली सरकार
  • दिल्ली ने जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन मांगा
  • 300 MT की जरूरत 1200 MT की मांग
  • दिल्ली ने जरूरत से ज्यादा कई गुना ऑक्सीजन मांगी
  • दिल्ली की मांग के चलते 12 राज्यों को दिक्कत हुई
  • राज्यों की ऑक्सीजन दिल्ली भेजी गई

नई दिल्लीः कोरोना वायरस ( Coronavirus ) की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली समेत देश के अन्य इलाकों में ऑक्सीजन संकट ( Oxygen Crisis ) का सामना करना पड़ा था। इस बीच दिल्ली में ऑक्सीजन संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) की ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने इस दौरान अपनी असल जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन (Delhi Oxygen Demand) की डिमांड की थी, जिसके चलते अन्य राज्यों को ऑक्सीजन की किल्लत (Delhi Oxygen Crisis) का सामना करना पड़ा. यहां तक कि कई जगहों पर खपत के आंकड़ों को लेकर भी कमेटी ने चूक की बात कही है.

तमाम बड़े अस्पतालों का डाटा एनालाइज किया गया

रिपोर्ट में बताया गया है कि कमेटी ने एक्यूरेट ऑक्सीजन रिक्वायरमेंट (Accurate Oxygen Requirement) के लिए एक फॉर्मूला तैयार किया था और उसे करीब 260 अस्पतालों में भेजा था. इस फॉर्मूले के तहत करीब 183 अस्पताल, जिसमें तमाम बड़े अस्पताल शामिल है, का डाटा एनालाइज किया गया.

 

इस डाटा के मुताबिक लिक्विफाइड मेडिकल ऑक्सीजन (Liquefied Medical Oxygen) के कंसम्पशन के मामले में इन 183 अस्पतालों का आंकड़ा 1140 मीट्रिक टन दिया गया था. पर असल में अस्पतालों से मिली जानकारी में यह महज 209 मीट्रिक टन है.

इसी आंकड़े को लेकर कहा गया है कि यदि यहां केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा सुझाया गया फॉर्मूला अपनाया जाए, तो असल जरूरत 289 मीट्रिक टन की होगी. जबकि अगर दिल्ली सरकार वाला फॉर्मूला अपनाया जाए तो यह 391 मीट्रिक तक पहुंचेगी. दोनों ही फॉर्मूले के बावजूद असल डिमांड जरूरत से बहुत अधिक है.

केंद्र और दिल्ली सरकार के फॉर्मूले को बनाया गया आधार

कमेटी की रिपोर्ट में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के नॉन आईसीयू बेड में ऑक्सीजन खपत के फॉर्मूले को भी बातों का आधार बनाया गया है. इसमें बताया गया है कि कई अस्पतालों ने कम बेड होने के बावजूद अपनी खपत जरूरत से कहीं अधिक दिखाई है. दोनों ही सरकारों के फॉर्मूले के बावजूद यह खपत जरूरत से कहीं अधिक है.

8 मई को किया कमेटी का गठन

8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने देश में ऑक्सीजन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 12 सदस्यीय टास्क फोर्स बनाया था. दिल्ली के लिए अलग से एक सब-ग्रुप बनाया गया था.

कमेटी में शामिल थे ये लोग

ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया, मैक्स हेल्थकेयर के संदीप बुद्धिराजा के साथ केंद्र और दिल्ली के 1-1 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल हैं.

एम्स डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया कर रहे थे नेतृत्व

गौरतलब है कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच ऑक्सीजन को लेकर मची खींचतान के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऑडिट कमेटी से दिल्ली में ऑक्सीजन की असल खपत और जरूरत की जांच के हिसाब से उसके बेहतर इस्तेमाल के विकल्प सुझाने के लिए कहा था. इस कमेटी का एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) नेतृत्व कर रहे थे, जबकि इसमें दिल्ली सरकार के बड़े अधिकारियों से लेकर कई अस्पतालों के डॉक्टर और एक्सपर्ट भी शामिल थे.

ऐसे उठी ऑडिट कमेटी की मांग

दरअसल सुप्रीम दिल्ली सरकार की मांग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया था कि दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन की सप्लाई की जाए.

कोर्ट में बहस के दौरान केंद्र के वकील सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा था कि दिल्ली को अधिकतम 415 मीट्रिक टन की जरूरत है. मेहता ने दिल्ली के ऑक्सीजन ऑडिट की मांग उठाई थी.

पेट्रोलियम ऐंड ऑक्सिजन सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ( PESO ) ने सुप्रीम कोर्ट की गठित टीम को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCTD) के पास जरूरत से ज्यादा ऑक्सिजन थी, जिसने दूसरे राज्यों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन (LMO) की सप्लाई प्रभावित की. पेसो ने कहा है कि अगर दिल्ली की मांग पूरी की जाती रही होती, तो राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सिजन संकट पैदा हो जाता.

बीजेपी ने साधा निशाना

ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट के बाद बीजेपी ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोल दिया. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दिल्ली सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के इस झूठ के कारण 12 ऐसे राज्य थे जो ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर अफेक्टेड हुए. क्योंकि सभी जगह से ऑक्सीजन की मात्रा काट कर दिल्ली भेजना पड़ा था.