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रबी फसलों की एमएसपी में 40 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

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The Union Minister for Information & Broadcasting, Youth Affairs and Sports, Shri Anurag Singh Thakur along with the Union Minister for Commerce & Industry, Consumer Affairs, Food &Public Distribution and Textiles, Shri Piyush Goyal holding a press conference on Cabinet Decisions, in New Delhi on September 08, 2021. The Minister of State for Textiles and Railways, Smt. Darshana Vikram Jardosh is also seen.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए पीएलआइ स्कीम (production-linked incentive scheme) को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुरने बताया कि कैबिनेट ने टेक्सटाइल के लिए 10683 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए पीएलआइ स्कीम (Anurag Singh Thakur) को मंजूरी दे दी है। रबी फसलों की एमएसपी में 40 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही गन्ना किसानों के लिए अब तक के उच्चतम और लाभकारी मूल्य 290 रुपये / क्विंटल को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पीयूष गोयल ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

अनुराग ठाकुरने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में टेक्टाइल मंत्रालय को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। 5 वर्षों में 10,683 करोड़ रुपये मूल्य के प्रोत्साहन मुहैया कराए जाएंगे। प्रत्यक्ष तौर पर 7.5 लाख से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ लेते हुए भारत अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपना वर्चस्व और दिखा पाएगा। विकसित देशों के साथ भी एफटीए करके हम कपड़ा व्यापार में बाकी देशों के सामने जो हमारी डिसेबिलिटी है उसे कवर करने का प्रयास कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि यह निर्णय कुछ वैश्विक चैंपियन तैयार करेगा। इससे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि को विशेष रूप से फायदा होगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीजन 2022-23 के लिए रबी फसलों के लिए एमएसपी को मंजूरी दी है।

विपणन मौसम 2022-23 के लिए सभी रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (रुपये/क्विंटल में)

फसल आरएमएस 2021-22 के लिए एमएसपी

 

आरएमएस 2022-23 के लिए एमएसपी

 

उत्पादन लागत* 202223 एमएसपी में बढ़ोतरी (संपूर्ण) लागत पर लाभ (प्रतिशत में)
गेहूं 1975 2015 1008 40 100
जौ 1600 1635 1019 35 60
चना 5100 5230 3004 130 74
दाल (मसूर) 5100 5500 3079 400 79
कैनोला और सरसों 4650 5050 2523 400 100
कुसुम के फूल 5327 5441 3627 114 50

यहां कुल लागत का उल्लेख हैजिसमें चुकाई जाने वाली कीमत शामिल हैयानी मजदूरों की मजदूरीबैल या मशीन द्वारा जुताई और अन्य कामपट्टे पर ली जाने वाली जमीन का किरायाबीज, उर्वरक, खादसिंचाई शुल्क, उपकरणों और खेत निर्माण में लगने वाला खर्चगतिशील पूंजी पर ब्याजपम्प सेटों इत्यादि चलाने पर डीजल/बिजली का खर्च इसमें शामिल है। इसके अलावा अन्य खर्च तथा परिवार द्वारा किये जाने वाले श्रम के मूल्य को भी इसमें रखा गया है।’

 

आरएमएस 2022-23 के लिए रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप है, जिसमें कहा गया कि देशभर के औसत उत्पादन को मद्देनजर रखते हुए एमएसपी में कम से कम डेढ़ गुना इजाफा किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को तर्कसंगत और उचित कीमत मिल सके। किसान खेती में जितना खर्च करता है, उसके आधार पर होने वाले लाभ का अधिकतम अनुमान किया गया है। इस संदर्भ में गेहूं, कैनोला व सरसों (प्रत्येक में 100 प्रतिशत) लाभ होने का अनुमान है। इसके अलावा दाल (79 प्रतिशत), चना (74 प्रतिशत), जौ (60 प्रतिशत), कुसुम के फूल (50 प्रतिशत) के उत्पादन में लाभ होने का अनुमान है।

पिछले कुछ वर्षों से तिलहन, दलहन, मोटे अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में एकरूपता लाने के लिये संयुक्त रूप से प्रयास किए जाते रहे हैं, ताकि किसान इन फसलों की खेती अधिक रकबे में करने के लिए प्रोत्साहित हों। इसके लिए वे बेहतर प्रौद्योगिकी और खेती के तौर-तरीकों को अपनायें, ताकि मांग और आपूर्ति में संतुलन पैदा हो।

इसके साथ ही केंद्र द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय खाद्य तेल–पाम ऑयल मिशन (एनएमईओ-ओपी) योजना को भी सरकार ने हाल में घोषित किया है। इस योजना से खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। इस योजना के लिये 11,040 करोड़ रुपये रखे गये हैं, जिससे न सिर्फ रकबा और इस सेक्टर की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि आय बढ़ने से किसानों को लाभ मिलेगा तथा अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे।

तथाकथित किसीन पिछले साल 26 नवंबर से तीन नए कृषि कानूनों- किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020; किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020 के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।