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आचार्य श्री ऋषभचन्द सूरीष्वरजी को गुणावाद सभा में हर श्रावक ने गुरूदेव को नम आखो से श्रद्वासुमन अर्पित किये

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झाबुआ।राकेश पोद्दार। नगर संवाददाता। राष्ट्र संत शिरोमणी मानव मसीहा आचार्य देवेश श्रीमद विजय ऋषभचन्द सूरीश्वरजी म. सा. के देवलोकगमन पर श्री ऋषभदेव बावन जिनालय मंदिर परिसर में श्री संघ के सदस्यों द्वारा उन्हें श्रृ़द्धांजलि अर्पित की गई। प्रवक्ता डाॅ. प्रदीप संघवी द्वारा जानकारी देते हुऐ बताया कि सर्वप्रथम वरिष्ठ समाज सेवी धर्मचन्द्रजी मेहता द्वारा श्री संघ के सदस्यों को आचार्य श्री के फोटो के सम्मुख गुरू वंदन करवाया। आचार्य श्री के फोटो पर वाक्षक्षेप एवं माल्यापर्ण संतोष चिराग नाकोड़ा परिवार द्वारा एवं दीप प्रज्जवलन संजय नगीनलाल कांठी परिवार के द्वारा किया गया।
गुणानुवाद सभा में आचार्य श्री के गुणों का वर्णण करते हुऐ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय पेढ़ी व्यवस्थापक संजय मेहता ने गुरू के जीवन पर प्रकाश डालते हुऐ महत्वपूर्ण जानकारी देते हुऐ बताया कि आचार्य श्री को मानवता के मसीहा की उपाधि उज्जैन में सनातन धर्म गुरूओं द्वारा दी थी। जैन अनुयायीयों के अलावा सनातन धर्म के संत की आचार्य बडा सम्मान देते थे और उतना ही सम्मान सनातन धर्म गुरू आचार्य श्री को देते थे। वरिष्ठ समाज सेवी धर्मचन्द्रजी मेहता द्वारा आचार्य जी के गुणों का वर्णण करते बताया कि भारत वर्ष में कम उम्र में सबसे ज्यादा ख्याति श्री ऋषभचन्द सूरीजी में ही पायी है।

वरिष्ठ समाज सेवी यशवन्त भण्डारी ने बताया कि कार्य को किस शैली में और कम समय में उच्च क्वालिटी का करवाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण आचार्य श्री ही है। हम सब का कर्तव्य बनता है कि गुरूदेव के बचे कार्य और स्वप्न हम मिलकर साकार करे। प्रवक्ता डाॅ. प्रदीप संघवी ने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में धर्म के साथ कैसे कार्य करना इसका सबसे बडा आदर्श आचार्य श्री थे। एक शिक्षक के रूप में छात्र के सार्थ कैसे बर्ताव करना यह यह मैने अपने शिक्षक जीवन में आचार्य श्री से सीखा और अंगीकार करने पर यह पाया कि संत का शिक्षा और स्वास्थ्य से जुडना कितना जरूरी हैं। आप ने बताया कि मानवता के मसीहा ने न सिर्फ तत्काल मात्र 8 दिन की तैयारी में कोविड मरीजों के उपचार के लिये अस्वस्थ होते हुऐ भी हास्पीटल खोला बल्कि स्वयं ने उनकी आ रही तकलीफो के निराकरण का प्रयास किया। श्री गौड़ीजी तीर्थ एवं महावीर बाग के ट्रस्टी संजय कुमार कांठी ने आचार्य श्री के बारे में बताया कि में उनकी स्वास्थ्य, शिक्षा, मूक प्राणी की सेवा व जरूरतमन्द की सेवा से बहुत प्रभाक्ति था और उसे अपने जीवन में अनुसरण करना का प्रयास करता हूॅ। कांठी ने बताया कि श्री अयोध्या राम मंदिर निर्माण के आमंत्रित 125 सदस्यों में आचार्य का आमंत्रण इस बात को सिद्ध करता था कि सभी धर्मो के प्रिय राष्ट्र संत थे। वरिष्ठ समाज सेवी राजमलजी राठौर ने श्री गौड़ीजी के प्रति स्नेह का जिक किया। परम गुरू भक्त मनोहर मोदी जो कि गुरूदेव से बचपन से जुडे हैं बताया कि आज में जो कुछ हुॅ गुरूदेव के आर्शीवाद से हुॅ मुनि जीवन से ही आचार्य श्री के साथ विहार में का सुअवसर मुझे मिलता आया हैं। श्रीमती लता संतोष नाकोडा ने ना चिðी ना कोई सन्देश गीत के माध्यम से नम आखो से गुरूदेव को याद किया। समाज सेवी अभय धारीवाल, ने बताया कि श्रीमती जीवन बाला पोरवाल की प्रथम गवली करने के कारण ही झाबुआ नगर को आचार्य पदवी के बाद 2017 के आचार्यश्री के प्रथम चार्तुमास का लाभ मिला था। वरिष्ठ समाज सेवी मनोहर भण्डारी ने कहा की हमें गर्व है कि प्रातः स्मरणीय श्री राजेन्द्र सूरीश्वरजी म. सा की छवि को श्री मोहन खेड़ा तीर्थ के सर्वागीण विकास के माध्यम से हर दिशा आचार्य श्री ने विश्व और देश की हर दिशा के फैलाया। वरिष्ठ समाज सेवी अशोक राठौर ने आचार्य के सम्पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ समाज सेवी अशोक कटारिया ने बताया कि करूणा हदय आचार्यश्री ने परिवार के पति-पत्नि, सास-बहु, भाई-भाई के कई झगडो का सुलझाया। वह मात्र 5 मिनिट में निर्णय कर देते थे और दोनों पक्ष उसे बिना शर्त स्वीकार भी करते थे। वरिष्ठ पत्रकार योगेन्द्र नाहर ने बताया कि मानवता के मसीहा का कोविड में 20000 जरूरत मन्द को भोजन एवं महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध करवाना उनके करूणा हदय की पहचान हैं। युवा समाज सेवी निखिल भण्डारी ने बताया कि हर इंसान के प्रति करूणा और चिन्ता के भाव का सबसे बड़ा उदाहरण ही में स्वय हुॅ। 2017 में मेरे एक्सीडेट के बाद जब में घर आया तो वह स्वयं का खराब प्रतिकुल होते हुऐ भी मुझसे मिलने घर आये। श्री संघ द्वारा संतोष नाकोडा द्वारा गुरूदेव के अस्वस्थ होने पर जो दिन रात सेवा दी उसके लिये धन्यवाद दिया। गुणानुवाद सभा का संचालन संजय कुमार कांठी द्वारा किया गया।
गुरू वंदन और गुणानुवाद के श्री संघ के वरिष्ठ सोहनलाल कोठारी, अन्तिम जैन, कांतिलाल पगारिया, राजेश मेहता, उल्लास जैन, नरेन्द्र पगारिया, मुकेश रूनवाल, रिकुं रूनवाल, सुनिल राठौर, हस्तीमल संघवी, जयेश संघवी, सुरेश कांठी, श्रीमती जीवन बाला पोरवाल, चिराग नाकोड़ा व कई वरिष्ठ सदस्य और महिलाऐ उपस्थित थी। समस्त आयोजन कोविड-19 के नियमों को ध्यान में रखते हुऐ किये गये।