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लम्पी त्वचा रोग (लम्पी स्कीन डिसिज) के संक्रमण होने पर तत्काल कन्ट्रोल रूम पर सम्पर्क करे पशुओं को लंपी स्किन रोग का टीका निःशुल्क लगवाये-कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह

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झाबुआ। राकेश पोद्दार। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रजनी सिंह के द्वारा आज विकास स्तर पर वेटनरी डॉक्टरों की बैठक कलेक्टर कार्यालय सभा कक्ष में ली गई। बैठक में निर्देश दिये की पशु चिकित्सा के डॉक्टर एवं वीएफए निरंतर अपने क्षेत्र में भ्रमण कर लंपी वायरस से पिडित पशुओं का टीका लगवाये एवं सावधानी के लिए आवश्यक निर्देश भी दे। जिले में किसी भी प्रकार से पशु हानि न हो इसका विशेष ध्यान दे। बैठक मेें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री सिद्धार्थ जैन, डी.डी.व्ही.श्री डॉ. विल्सन डावर, एसडीएम झाबुआ आदि उपस्थित थे।
लंपी स्किन रोग पशुओं (गायों-भैसों) में तेजी से फैलने वाला विषाणुजनित (लंपी वायरस) संक्रमण रोग है। संक्रमित पशु के शरीर पर परजीवी कीट, किलनी, मच्छर, मक्खियों से तथा दूषित जन, दूषित भोजन एवं लार के सम्पर्क से यह रोग अन्य पशुओं में फैलता है। पशुओं में मृत्युदर बहुत कम होती है तथा 2-3 सप्ताह में पशु स्वस्थ हो जाता है। मनुष्यों में इस रोग के संक्रमण का खतरा नहीं है।
रोग के प्रमुख लक्षणः- पशु में तेज बुखार आना, मॅुह से लार आना, ऑख एवं नाक से पानी आना, लिम्फ नोड्स तथा पैरों में सूजन आना, पशुओं के शरीर पर त्वचा में बडी संख्या में गठनों का बन जाना।
रोकथाम एवं बचाव के उपायः- संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से पृथक रखना। कीटनाशक (अमितराज/साइपरमेथ्रिन/डेल्टामेथ्रिन/पौटेशियम परमेग्नेंट) से पशुओं के परजीवि, कीट किलनी, मच्छर आदि को नष्ट करना। पशुओं के आवास-बाडे की सफाई (फार्मलीन 1 प्रतिशत या फिनॉल 2 प्रतिशत या सोडियन हाइप्रोक्लोराईट 2-3 प्रतिशत या आयोडीन कम्पाउण्ड) से करे। संक्रमित पशु को अविलम्ब पशु चिकित्सक से उपचार कराना। पशुओं को घर बांधकर चारा खिलाये एवं बाहर तब तक न छोडे जब तक बीमारी की आशंका हो।
लम्पी त्वचा रोग (लम्पी स्कीन डिसिज) की जानकारी/उपचार के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग झाबुआ-कन्ट्रोल रूम फोन नम्बर – 07392-244354, उप संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग मो.नम्बर- 7089644100, अतिरिक्त उप संचालक, झाबुआ मो. नम्बर- 9993818138 पर सम्पर्क करे। स्वस्थ गौवंश पशुओं का निकटतम पशु चिकित्सक से टीकाकरण करावें। लम्पी रोग से संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। संक्रमित पशुओं का उपचार निकटतम पशु चिकित्सक से लेवें। चार से पॉंच दिन उपचार पश्चात पशु स्वस्थ हो जाएगा।