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पालकों से अधिक फीस की वसूली की तो निजि स्कूल संचालकों पर गिर सकती है गाज शासन स्तर से जारी दिशा निर्देशों का करना होगा पालन

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झाबुआ। राकेश पोद्दार। नगर संवादददाता। दुबले को दो आसाढ वाली कहावत पिछले डेढ वर्ष अर्थात कोविड के लाक डाउन काल में नीजि एवं महंगें स्कूलों के संचालकों पर भारी पडी है। स्कूलों के बंद रहने के चलते जहां पालकों ने अपने बच्चों को स्कूलों में पढाई के लिये नही भेजा वही इन स्कूलों जो कि भारी भरकम फीस लेती रही है, को अपने स्टाफ को वेतन तक देने में मशक्कत करना पडी है। झाबुआ जिले की बात करें तो यहां करीब 40 से 50 से अधिक नीजि स्कूल है वही इन स्कूलों में कथित तौर पर सीबीएसई की पढाई के नाम पर पालकों से मोटी धनराशि की वसूली फीस के रूप में की जाती रही है। अब चूंकि प्रदेश सरकार ने ऐसे नीजि स्कूलों द्वारा बच्चों की फीस अनाप शनाप वसूल करने को लेकर हरकत में आकर आदेश जारी किये है कि स्कूलों द्वारा छात्रों के पालकों से अधिक फीस की वसूली नही की जावे। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले के कलेक्टर एवं संबंधित विभागों को भेजे गये अपने परिपत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि अशासकीय विद्यालयों के द्वारा फीस वृद्धि के संबंध में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना है तथा ऐसी प्रत्येक शिकायत का निराकरण कर अवगत करवाना है। जिले के डीपीसी एलएन प्रजापति ने इस बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस एवं संबंधित विषयों का विनियमन) नियम 2020 मध्यप्रदेश, जो 2 दिसंबर 2020 को असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है के तहत प्रदेश अंतर्गत संचालित समस्त अशासकीय हाई स्कूल हाई एवं हाय सेकेंडरी स्कूल (माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश अन्य बोर्ड संबद्धता प्राप्त) तथा राईट टू एज्यूकेशन याने शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत कक्षा एक से आठवीं तक मान्यता प्राप्त अशासकीय शालाओं के वार्षिक फीस वृद्धि के विनियमन की संबंध में 2 दिसंबर 2020 से प्रभावशील नियमों के तहत है, मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम 2020 के तहत अशासकीय विद्यालयों द्वारा फीस में वृद्धि के संबंध में जो जानकारी प्रतिवर्ष प्रस्तुत की जाना है उसके लिए ऑनलाइन माड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिससे निर्देश जारी किए गये है। सरकार के निजी विद्यालय नियम 2020 में प्रावधान है कि यदि अशासकीय शाला द्वारा वर्तमान सत्र में नियत की गई फीस विगत और सत्र की तुलना में 10प्रतिशत से अधिक है तो अधिनियम, नियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रक्रिया का पालन करते हुए निजी विद्यालयों को जिला स्तरीय फीस विनियमन समिति से स्वीकृति लेना अनिवार्य है।
ज्ञातव्य है कि मीडिया के माध्यम से खबरें प्रकाशित हुई है कि अशासकीय विद्यालय द्वारा इस वर्ष फीस में अत्यधिक वृद्धि बगैर सश्रम समिति के अनुमोदन से की गई है। इस संबंध में शासन के स्पष्ट निर्देश है कि यदि अशासकीय विद्यालयों द्वारा 10प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि बिना सक्षम समिति की स्वीकृति से किए जाने की शिकायतें अभिभावकों व अन्य माध्यम से प्राप्त होने पर जिला स्तरीय फीस विनियमन समिति द्वारा उक्त शिकायतों को संज्ञान में लिया जाकर शिकायतों का निराकरण संबंधित अधिनियम नियम के प्रावधानों के आधार पर किया जाए।
शासन के इन नियमों के तहत झाबुआ जिले में भी कलेक्टर झाबुआ को प्रत्येक अशासकीय स्कूल के गत वर्ष तक के फीस की जानकारी लेकर तथा वर्तमान में उनके द्वारा कितनी फिस तय की गई है, जानकारी संकलित करना एवं इसे सार्वजनिक करना बच्चों के पालकों के हित में है। इस पर यदि जिला प्रशासन ईमानदारी से कार्यवाही करता है तो नीजि स्कूलों के शोषण से पालकों को बचाया जासकता है।