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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मांगा निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के रेट का ब्यौरा

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जबलपुर हाईकोर्ट, File PIc

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ को निर्देश दिया है कि राज्य के निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के रेट का ब्यौरा पेश किया जाए। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई पांच जुलाई को निर्धारित की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नागरथ ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना के इलाज के रेट जरूरत से ज्यादा तय कर दिए है। प्रदेश में ऐसे कई अस्पताल है, जिनके रेट सरकार द्वारा तय रेट से कम है। इस पर डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को निजी अस्पतालों के रेट का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट मित्र ने सुझाव दिया है कि प्रदेश के जिला अस्पतालों में न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित की जाना चाहिए, ताकि प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में एकरूपता बनी रहे।

सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू, ऑक्सीजन और एम्बुलेन्स की सुविधा होना चाहिए। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने यह मामला उठाया था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 204 वेटिंलेटर डिब्बों में बंद थे, उनका उपयोग ही नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश कर बताया गया कि प्रदेश में 11 मई को कोरोना के पीक पर एक दिन में 1 लाख 11 हजार 366 केस आए थे। उस दौरान प्रदेश में 1370 वेटिंलेटर चालू और कार्यरत थे। उनमें से केवल 517 वेटिंलेटर का ही उपयोग किया गया। सुनवाई के बाद डिवीजन बैंच ने मामले की अगली सुनवाई पांच जुलाई को निर्धारित की है।राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरूषेंद्र कौरव ने पक्ष प्रस्तुत किया।