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झारखंड की राजधानी राँची में बीच से टूट गया 13 करोड़ में बना नया पुल: प्रशासन चुप, इसी ठेकेदार का बनाया एक और पुल ढहा था

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झारखंड की राजधानी राँची में काँची नदी पर बना एक नवनिर्मित पुल ढह गया। 13 करोड़ की लागत से बना हाराडीह-बुढ़ाडीह पुल गुरुवार सुबह करीब 4:30 बजे ढह गया। यह पुल राँची के तमाड़, बुंडू और सोनाहातु को जोड़ता था। स्थानीय लोगों ने इसके लिए लगातार अवैध बालू खनन और प्रशासनिक ढिलाई का आरोप लगाया है।

इस पुल के दो अन्य पिलर भी कमजोर हैं और स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की तत्काल मरम्मत की जरूरत है, नहीं तो पूरा ढाँचा ढह सकता है। अवैध बालू खनन की वजह से झारखंड में ढहा ये तीसरा पुल है।

ये घटना राँची के तामार इलाके में हुई। चक्रवात Yaas की वजह से चली तेज हवाओं और उसके बाद हुई तेज बारिश के कारण कमजोर संरचना ढह गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 600 मीटर लँबे इस पुल के निर्माण में बहुत अनियमितताएँ बरती गईं और मजबूती का ध्यान रखे बिना ही दलदल में ही पुल के पिलरों को खड़ा कर दिया गया। कमजोर नींव होने की वजह से Yaas तूफान के सामने ये पुल टिक नहीं सका और बीच से टूट गया। पुल टूटने से दोनों ओर के ग्रामीण फँस कर रह गए हैं।

‘अवैध बालू खनन रोकने के लिए प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई’

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के आसपास नदीं से काफी ज्यादा अवैध बालू खनन होता है। बालू तस्कर नदी पुल के आसपास जेसीबी के जरिए बालू खनन करते हैं और यही पुल के टूटने की प्रमुख वजह है। गाँव वालों का आरोप है कि अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल का ढंग से उद्घाटन तक नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पुल को राँची के उसी ठेकेदार रंजन सिंह ने बनाया है जिनका इस पुल से थोड़ी ही दूर काँची नदीं पर बनाया एक और पुल दो साल पहले टूट चुका है।

पुल टूटने की खबर सुनकर घटनास्थल पर पहुँचे विधायक विकास मुंडा ने भी माँग की है कि इससे पहले भी एक और बड़ा पुल गिरा था और दोनों की कंस्ट्रक्शन कंपनी एक ही है, इसलिए मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।