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राज्य सरकारों के लिए भस्मासुर रही कांग्रेस ही कमलनाथ सरकार के अंत की जिम्मेदार : विष्णुदत्त शर्मा

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पहले 105 सरकार गिरा चुकी कांग्रेस को 106 वां श्रेय दिग्विजय की कृपा से मिला

 भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा है कि सरकारें गिराना कांग्रेस का पुराना अलोकतांत्रिक शौक है। इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस जब जब केन्द्र सरकार में रही, तब उसने निर्दयतापूर्वक राज्य सरकारों को कुचला। वैचारिक असहमति को राजनैतिक हिंसा तक ले जाना कांग्रेस की परिपाटी का हिस्सा है। इन तथ्यों को कोई छुपा नहीं सकता कि कमलनाथ सरकार से पहले देश में 105 सरकारें गिराने का कारनामा कांग्रेस ने ही किया है और दिग्विजय सिंह जी की कृपा से 106 वी कमलनाथ सरकार को गिराने का श्रेय भी कांग्रेस के ही खाते में जाता है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ वही हुआ है जो भस्मासुर के साथ हुआ था कि दूसरों के सिर पर हाथ रखते रखते अपने ही सिर पर हाथ रखकर स्वयं की सरकार को ही भस्म कर दिया।

 

श्री शर्मा ने कहा कि यदि मध्यप्रदेश की ही बात करें तो कांग्रेस ने 1980 और 1992 में मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार को गिराया। उत्तर प्रदेश में श्री कल्याण सिंह और श्री चरण सिंह की सरकार को गिराया। राजस्थान में श्री भैंरोसिंह शेखावत और पंजाब में श्री प्रकाश सिंह बादल की सरकार को गिराया। तमिलनाडू में श्री करूणानिधि और उडीसा में नंदनी सतपति की सरकार को गिराया। महाराष्ट्र में शरद पवार और कर्नाटक में वीरेन्द्र पाटिल की सरकार को कुचला। कर्नाटक में देवराज उर्स, एसआर बोम्मई की सरकार को निपटाया। आंध्रप्रदेश में एनटी रामाराव और बिहार में रामसुंदर दास तथा जगन्नाथ मिश्रा की सरकार को नेस्तनाबूत किया। ऐसी 105 सरकारों की सूची कमलनाथ सरकार गिरने से पहले बन चुकी थी, जिसे कांग्रेस ने बेहद निर्मम तरीके से धराशायी किया। यह अलग बात है कि 106 वी सरकार गिरने का कारण कांग्रेस का अंर्तकलह बनी है, लेकिन फिर भी दिग्विजय सिंह जी कृपा से सरकार गिरने का श्रेय तो कांग्रेस को ही जाता है।

 

दिग्विजय सिंह के लिए क्या पंच भी इस्तीफा देगा ?

   श्री शर्मा ने कांग्रेसियों द्वारा श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर की जा रही बयानबाजी को कांग्रेस की ओछी मानसिकता बताते हुए कहा कि यदि अन्याय अत्याचार और भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाना कांग्रेसियों की नजर में गलत है तो हमें सिंधिया जी की इस गलती पर गर्व है। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को सही रास्ते पर चलने के लिए कई बार आगाह किया, पर्याप्त अवसर भी दिया, लेकिन दिग्विजय सिंह जी छाया में चलने वाली सरकार को घमंड के अधंकार ने घेर लिया था। जिस दिन कमलनाथ ने बेहद फूहड़ तरीके से श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सड़क पर उतरने की नसीहत दे डाली थी, सरकार की उल्टी गिनती तो उसी दिन शुरू हो गयी थी। एक कहावत है कि सावन के अंधे को हरा-हरा ही दिखता है। पूरा देश जानता है कि कांग्रेस की संस्कृति में सरकारों का एक ही काम है भ्रष्टाचार और सिर्फ भ्रष्टाचार। इसलिए उनसे अन्य किसी प्रकार के बर्ताव की अपेक्षा नहीं की सकती। वे सिंधियाजी के विरूद्ध जिस प्रकार की साजिशें सोशल मीडिया और अन्य प्रकार से कर रहे हैं, उसके बचे खूचे गंभीर परिणाम कांग्रेस को आने वाले विधानसभा के उपचुनाव में भुगतने पडेंगे। कांग्रेसियों को यह समझ लेना चाहिए कि जिस व्यक्ति की इज्जत की खातिर 6 मंत्री और 16 विधायकों ने अपना मंत्री पद और विधायकी छोड़ दी हो उसके सम्मान का पैमाना कितना बड़ा है। मेरी चुनौती है कि दिग्विजय सिंह के सम्मान में कोई पंच और सरपंच भी अपना पद छोडकर बताएं। सच तो यह है कि कांग्रेस के बचे खूचे ठीक ठाक लोगों में अब बेचैनी है कि अब उनका अस्तित्व क्या होगा जब श्रीमान दिग्विजय सिंह के कांधे पर पार्टी सवार होती जा रही है ? यह दीगर बात है कि श्री कमलनाथ बहुत स्पष्ट रूप से बता चुके है कि उनकी सरकार दिग्विजय सिंह पर विश्वास करने के कारण गिरी। लेकिन कमलनाथ को समझने में बहुत देरी हो गयी।