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बकरी चराने गया बच्चा डैम में गिरा…थाना प्रभारी गिरीश शर्मा गोद में लेकर भागे और बचा ली उसकी जान

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दतिया. मुसीबत के पलों में दतिया (Datia) में खाकी वर्दी वाले (Police) फिर फरिश्ता बनकर सामने आए. इस बार पुलिसवाले ने एक मासूम बच्चे की जान बचा ली. चिरुला के थाना प्रभारी गिरीश शर्मा की चारों तरफ तारीफ हो रही है. उनकी तत्परता और मदद ने एक बच्चे की जान पर आए संकट को दूर कर दिया. बच्चा डूब गया था, लेकिन थाना प्रभारी ने उसे बचाने के लिए तत्परता दिखाई और अब वह बच्चा सही सलामत है.

 

दतिया में पिछले हफ्ते आई बाढ़ में स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के साथ पुलिस भी स्थानीय लोगों के लिए मददगार साबित हुई. बाढ़ में तो सबने मदद की ही. अब बाढ़ उतरने के बाद भी लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है. पुलिस अपने उसी मददगार वाले रोल में है.

 

डैम में गिर गया था बच्चा

मामला चिरुला थाना इलाके का है. सोमवार शाम को यहां रहने वाला 11 साल का एक बच्चा बकरी चराने गया था. उसी दौरान उसका पैर फिसला और वह यहां के अंगूरी डैम में जा गिरा. पानी लबालब था. बच्चे के डैम में गिरने की सूचना चिरूला थाना प्रभारी गिरीश गौतम तक पहुंच गई. खबर मिलते ही गिरीश शर्मा फोर्स के साथ अंगूरी डैम पहुंच गए और अपनी टीम की मदद से बच्चे को सही समय पर बाहर निकाल लिया.

 

डैम से निकले रेलवे क्रॉसिंग पर फंसे

पुलिस की टीम ने फुर्ति और सूझबूझ से बच्चे को डैम से निकालकर डूबने से तो बचा लिया और फिर उसे फौरन अस्पताल लेकर दौड़े. अभी रास्ते में एक और मुसीबत उनका इंतजार कर रही थी. अस्पताल के रास्ते में एक रेलवे क्रॉसिंग पड़ती है. जैसे ही पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची तो देखा कोई ट्रेन निकलने वाली है और रेलवे फाटक बंद है. दूसरी तरफ एंबुलेंस खड़ी थी उसमें बच्चे को लेकर जाना था.

 

पटरी पार ज़िंदगी कर रही थी इंतजार

इतना वक्त नहीं था. बच्चे की सांस अटक रही थी. अब एक तरफ बच्चा अपनी सांसें गिन रहा था और दूसरी तरफ सामने से ट्रेन निकलने वाली थी. थाना प्रभारी गिरीश शर्मा ने बेसुध पड़े बच्चे को गोद में उठाया और उसे लेकर दौड़ लगा दी. ट्रेन आने में अभी वक्त था. थाना प्रभारी ने फौरन ट्रैक के दोनों तरफ देखा. दोनों तरफ दूर-दूर तक ट्रेन नहीं थी. उन्होंने बच्चे को गोद में लिए हुए ही झुककर गेट पार किया और गेट के दूसरी तरफ खड़ी एंबुलेंस में उसे पहुंचाया. बच्चे को लेकर एंबुलेंस सरपट भागी और समय पर उसे अस्पताल पहुंचा दिया. बच्चे को समय पर इलाज मिल गया और उसकी जान बच गयी. डॉक्टरों का कहना है कि अगर अस्पताल पहुंचने में ज़रा सी भी देर होती तो बच्चे की जान जा सकती थी.