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मप्र के विदिशा की लटेरी रेंज की घटना को लेकर जिले में मप्र वन कर्मचारी संघ एवं वन मंडल के समस्त अधिकारी-कर्मचारियो  ने जताया तीव्र आक्रोश

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जिला वन मंडलाधिकारी को सुरक्षा शस्त्र सौंपने के साथ स्वतंत्रता दिवस पर प्राप्त पुरस्कार भी लौटाए
मप्र के मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त कलेक्टर श्री झा को सौंपा ज्ञापन

झाबुआ। राकेश पोद्दार। वन मंडल विदिशा की लटेरी रेंज की घटना में पुलिस प्रशासन द्वारा वन कर्मचारियों के खिलाफ जबरन एफआईआर दर्ज करने एवं मप्र सरकार द्वारा वन अपराधियों को पुरुस्कार स्वरूप 25 लाख रूपये तथा परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने के विरोध में मप्र वन कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय आव्हान पर जिले में भी संघ से जुड़े समस्त अधिकारी-कर्मचारियांे ने इस पर तीव्र विरोध जताया। विरोध स्वरूप वन मंडल झाबुआ मंे कार्यरत समस्त अधिकारी-कर्मचारियांे ने अपने सुरक्षा शस्त्र वन मंडलाधिकारी को सौपंने के साथ स्वतंत्रता दिवस पर प्राप्त पुरस्कारों को भी लौटा दिया। बाद रैली के रूप में नारेबाजी के साथ कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त कलेक्टर सुनिल झा को ज्ञापन सौंपा गया।

जानकारी देते हुए मप्र वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह अमलियार ने बताया कि पिछले दिनांे वन मंडल विदिशा अंतर्गत आने वाले लटेरी रेंज की घटना अत्यंत निंदनीय है। यहां के पुलिस प्रशासन ने बजाय वन अपराधियांे पर कार्रवाई करने के वनांे की सुरक्षा करने वाले वन कर्मचारियांे पर ही एफआईआर दर्ज कर दी। ओर तो ओर मप्र सरकार द्वारा ऐसे वन अपराधियांे को सरंक्षण देते हुए उन्हें पुरस्कार भी प्रदान किया गा एवं शहीद का दर्जा देते हुए परिवार को सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा कर दी है। जिससेे पूरे प्रदेश में वन विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियांे में तीव्र आक्रोश है एवं सभी ने मिलकर फैसला लिया है कि जब तक विदिशा में वन अमले पर दर्ज धारा 302, 307 एवं 34 भादवि नस्तीबद्ध नहीं की जाती है, तब मप्र वन कर्मचारी संघ का प्रदर्शन सत्त जारी रहेगा।
बिना मजिस्ट्रीयल जांच के वन कर्मचारियांे पर अपराध ना हो दर्ज
वन मंडल से जुड़़े अधिकारी-कर्मचारियांे ने वन मंडलाधिकारी को भी एक पत्र सौंपा। जिसमें कहा गया कि विदिशा की लटेरी रेंज में घटित घटना अत्यंत ही निंदनीय है। जिससे समस्त वन कर्मचारियांे का मनोबल काफी गिरा है। पत्र मंे मांग की गई कि जब तक कर्मचारियांे को शस्त्र चालान के अधिकार नहीं दिए जाते है, तब तक उन्हंे शस्त्र प्रदाय नहीं किए जाए। साथ ही बिना मजिस्ट्रीयल जांच के वन कर्मचारियांे के विरूद्ध एफआईआर दर्ज नहीं की जाए। विरोध प्रदर्शन अवसर पर वन मंडल के तीनों रेंज के रेंजर्स और तहसील अध्यक्ष के साथ बड़ी संख्या में जिले के कर्मचारीगण उपस्थित थे। मप्र वन कर्मचारी संघ की इस जायज मांग का संयुक्त अधिकारी-कर्मचारी महासंघ द्वारा भी समर्थन किया गया है।