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मुफ्त की रेवड़ियां ही जीत की गारंटी नहीं! 72 हजार की मिनिमम इनकम गारंटी भी नहीं लगा पाई थी कांग्रेस की नैया पार | Congress – Karnataka-Madhya Pradesh and Rajasthan elections – minimum income guarantee of 72 thousand

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मुफ्त की रेवड़ियां ही जीत की गारंटी नहीं! 72 हजार की मिनिमम इनकम गारंटी भी नहीं लगा पाई थी कांग्रेस की नैया पार

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी Image Credit source: pti

मुफ्त की रेबड़ियां कहो या फ्रीबीज का अंग्रेजी चोला उढ़ाओ, अगर मकसद गरीबी हटाना है तो कौन इससे किनारा करना चाहेगा? राजनीतिक दल तो हरगिज नहीं. ऊपर से अगर ये मुद्दा चुनाव जितवा दे तो फिर आइडिया ही आइडियोलॉजी बन जाता है. कांग्रेस के साथ भी ऐसा ही कुछ होता दिखाई दे रहा है. देश की सबसे पुरानी पार्टी फिलहाल मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनावों को लेकर मुस्तैद दिखाई दे रही है. इस बाबत ‘ये फ्री वो फ्री’ के जुबानी बाण भी राजनेताओं के तरकश से लगातार एक-एक कर निकाले जा रहे हैं.

फ्री… फ्री…फ्री… के इस इश्तिहार पर कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में मिली चुनावी जीत का ट्राइड एंड टेस्टेड वाला ठप्पा भी चिपका रही है. कर्नाटक का किला फतह करने के बाद अब देश के दिल को भी कांग्रेस पार्टी इसी कन्सेप्ट से जीतने के मूड में है. हो भी क्यों न. मध्य प्रदेश में तो पिछले चुनावों में कांग्रेस पार्टी को जितवाने और सत्ता का स्वाद चखाने में किसानों को कर्जा फ्री करने का ऐलान काफी चर्चा में रहा था. इसी वादे को पूरा न कर पाने का बहाना बना ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से दूरी बनाई और चंद महीनों में कमलनाथ का किला ढहा दिया.

वो बात 2018 की थी. एमपी विधानसभा के एक साल बाद लोकसभा चुनाव हुए. कांग्रेस ने इस बार जो बाण चलाया, उसके बारे में तो विकसित देशों में ही चर्चाएं सुनी थीं. ‘मिनिमम इनकम गारंटी,’ इस कन्सेप्ट के जरिए कांग्रेस देश के हर गरीब परिवार को 6 हजार हर महीने देने वाली थी. साल के 72 हजार रुपए. कांग्रेस को लगा कि ये बाण उनके लिए ब्रह्मास्त्र का काम करेगा, जो बीजेपी के स्टार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैजिक को भी फीका कर देगा.

कांग्रेस ने मिनिमम इनकम गारंटी का जमकर प्रचार किया

कांग्रेस पार्टी ने मिनिमम इनकम गारंटी का जमकर प्रचार किया. इसको लेकर चर्चाएं भी खूब हुईं कि कांग्रेस का मिनिमम इनकम गारंटी दुनिया के पटल पर बुदबुदाए जाने वाले यूनिवर्सल बेसिक पे से काफी अलग है. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में आए नतीजों ने ये साफ कर दिया कि मुफ्त की रेवड़ियां ही सबकुछ नहीं हैं. जनता ने इस मुद्दे को तवज्जो न देते हुए सिरे से खारिज कर दिया और बता दिया कि चुनाव में और भी कई मुद्दे अहमियत रखते हैं. लोग आर्थिक सहायता की जगह ऐसा सपोर्ट चाहते हैं, जिससे वो खुद को और अपने परिवार को सम्मान के साथ खुद की कमाई रकम से चला सकें.

कर्नाटक में ही पार्टी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली सहित अन्य वादे किए

बहरहाल कांग्रेस ने हार के बाद अपना ये प्लान छोड़ दिया और इस प्लान को भारतीय जनमानस के सामने लाने वाले राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी. अब एक बार फिर कांग्रेस पार्टी फ्रीबीज का कन्सेप्ट धड़ल्ले से जनता के सामने रख रही है. कर्नाटक में ही पार्टी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, परिवार की महिला मुखिया को 2000 रुपए, ग्रेजुएशन पूरी कर चुके युवाओं को हर महीने 3000 और डिप्लोमा होल्डर्स को 1500 रुपए प्रति माह के साथ महिलाओं को राज्य की सरकारी बसों में फ्री यात्रा का वादा किया.

कांग्रेस ने MP में किया ये ऐलान

इन वादों पर पार्टी कर्नाटक चुनाव जीत भी गई. कई दिग्गजों का मानना है कि बीजेपी की कुछ कमियों, एंटी इनकंबेंसी, जातीय समीकरण के अलावा कांग्रेस पार्टी की जीत में फ्रीबीज का भी बड़ा योगदान रहा. कांग्रेस भी इसी थ्योरी पर यकीन कर रही है. शायद इसी लिए वो मध्य प्रदेश में भी फ्री वाला ये ही थ्योरम लगा रही है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में भी महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए, बिजली फ्री और किसानों को कर्जा फ्री करने का ऐलान कर चुकी है. पार्टी को भरोसा है कि ये वाला दांव इस बार भी चल जाएगा, लेकिन इसकी सफलता के उदाहरण के साथ कांग्रेस पार्टी के पास विफलताओं की भी लंबी लिस्ट है.