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बिहार में स्कूल से अगवा कर शिक्षक का कराया पकड़ौआ विवाह

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बिहार में एक शिक्षक का पकड़ौआ विवाह कराने की घटना सामने आई है। शिक्षक को स्कूल से ही उठा लिया गया था। अपहरण की शिकायत और आक्रोशित लोगों के बवाल के बाद पुलिस ने लड़का-लड़की को कस्टडी में ले लिया है। दोनों की शादी की तस्वीर भी वायरल है।

घटना वैशाली जिले की है। हाल ही में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर शिक्षक बने गौतम कुमार को बुधवार (29 नवंबर 2023) को स्कूल से अगवा कर लिया गया ​था। गौतम पातेपुर के रेपुरा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक हैं। वे पातेपुर थाना क्षेत्र के ही महया मालपुर गाँव के रहने वाले हैं।

शिक्षक को अगवा किए जाने की बात सामने आने के बाद आक्रोशित लोगों ने ताजपुर-हाजीपुर स्टेट हाइवे जाम कर दिया। इसके कुछ बाद पातेपुर पुलिस ने शिक्षक गौतम कुमार को महनार थाना क्षेत्र के नारायणपुर डेढ़पुरा गाँव से बरामद किया। साथ में उनकी नई नवेली दुल्हन भी थी। इस मामले में पुलिस ने एक शख्स को हिरासत में भी लिया है।

गौतम कुमार बुधवार की दोपहर बच्चों को पढ़ा रहे थे। तभी गाँव के ही राजेश राय, डब्लू राय, भूषण राय, विनोद राय, प्रमोद राय स्कूल पहुँचे और पिस्टल के बल पर धमकाया और बोलेरो में बैठाकर जबरन अपने साथ ले गए। स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य और गौतम कुमार के दादा ने पातेपुर थाने में अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई। शिक्षक के अपहरण से गुस्साए परिवारवालों और ग्रामीणों ने एसएच-49 पर यातायात रोक दिया।

बिहार में अगवा शिक्षक के पकड़ौआ शादी की तस्वीर वायरल (फोटो साभार: आज तक)

पुलिस ने कुछ घंटों में अगवा शिक्षक को उनकी पत्नी के साथ बरामद कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक राजेश राय की बेटी से शिक्षक गौतम की पकड़ौआ शादी कराई गई है। शादी लड़की के चाचा के ससुराल नारायणपुर डेढ़पुरा में हुई। अब इस मामले में लड़का और लड़की के परिवारों के बीच आपसी समझौते की बातें भी सामने आ रही है।

पातेपुर थाना के प्रभारी हसन सरदार ने बताया कि 164 के तहत शिक्षक का बयान कोर्ट में दर्ज करवाया जाएगा। कोर्ट में दिए बयान के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने पकड़ौआ विवाह से जुड़े एक मामले के सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी महिला की माँग में जबरदस्ती सिन्दूर लगाना या लगवाना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह तब तक वैध नहीं है, जब तक कि यह स्वैच्छिक न हो। इसमें ‘सप्तपदी’ (अग्नि के सात फेरे) की रस्म निभाना जरूरी है।