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जिन मुस्लिम क्रिकेटरों ने की ‘बहन’ के साथ शादी, TOI ने उसमें सहवाग को भी जोड़ा: फोटो में हमेशा दिखाता रहा है हिंदू-घृणा

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सेक्युलर दिखने के चक्कर में कभी-कभी बेहद हास्यास्पद स्थिति का सामना करना पड़ता है और ऐसी ही कुछ स्थिति का सामना दैनिक अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India- TOI) को करना पड़ रहा है। TOI ने इस बार भी कुछ ऐसी शरारत की है, जो वह आमतौर पर करते रहता है और सेक्युलरिज्म के ब्रांड एंबेसडर के रूप में प्रस्तुत करता है।

टीओआई ने ऐसे क्रिकेटर्स की एक स्टोरी छापी है, जिन्होंने अपनी चचेरी/मौसेरी/फुफेरी बहनों से शादी की है। बात यहाँ तक तो ठीक है, लेकिन स्टोरी को सेक्युलर दिखाने के चक्कर में जब झूठ का पुट डाल दिया जाए तो विश्वसनीयता का खतरा बन जाता है। इस स्टोरी में टीओआई ने जिन पाँच क्रिकेटरों के नाम का जिक्र किया है, उनमें वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) का नाम भी शामिल कर दिया है। बाकी के चार क्रिकेटर मुस्लिम हैं, संभवत: इसलिए सहवाग का नाम डाला गया है, ताकि स्टोरी भी सेक्युलर बन जाए। स्टोरी के अंत में सहवाग का जिक्र किया गया है, लेकिन उन्हें स्टोरी में कवर फेस बनाया गया है। यानी सहवाग के नाम के नाम पर कजिन बहनों से शादी करने वाले मुुस्लिम क्रिकेटरों की स्टोरी बेची जा रही है।

सहवाग की पत्नी आरती उनकी चचेरी, फुफेरी या मेमेरी बहन हैं ही नहीं और ना ही सहवाग के सीधे रक्त-संबंध वाले रिश्ते से जुड़ी हैं। इसके बावजदू टाइम्स ऑफ इंडिया ने दोनों को अपनी स्टोरी में शामिल किया और सहवाग-आरती की फोटो को अपना कवर फोटो बनाया। बता दें कि कजिन बहनों के साथ मुस्लिमों में निकाह करना जायज है, लेकिन हिंदुओं में सीधे ब्लड रिलेशन में शादी को घृणा की दृष्टि से देखा जाता है और टीओआई ने इस रिश्ते को घृणित बनाने का उससे कहीं अधिक घृणित प्रयास किया है।

स्वराज मैगजीन के कंसल्टिंग एडीटर और लेखक आनंद रंगनाथन ने ट्विटर पर इस आर्किटल को लेकर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट किया, “यह बकवास है। एक लेख में TOI ने अपनी कजिन बहनों से शादी करने वाले 5 क्रिकेटरों में 4 मुस्लिमों का जिक्र किया है, फिर अंत में वीरेंद्र सहवाग को जोड़ दिया, क्योंकि “उनकी पत्नी की बुआ की उनके चचेरे भाई से शादी हुई है’। यह वीरू और उसकी पत्नी को आनुवंशिक रूप से कैसे जोड़ता है?”

बता दें कि आरती की बुआ (पिता की बहन) की शादी वीरेंद्र सहवाग के चचेरे भाई के साथ हुई है। इस हिसाब से आरती और सहवाग के बीच कोई सीधा रिश्ता नहीं है और ना ही दोनों परिवार आनुवांशिक तौर पर जुड़े हैं। फिर इस इनकी शादी को अपनी बहन के साथ निकाह करने वाले क्रिकेटरों के साथ जोड़ा जाता है, ताकि ‘सेक्युलरिज्म’ बना रहे। एनडीटीवी और टीओआई जैसे अखबार अपनी खबरों द्वारा ‘सेक्युलरिज्म’ की रक्षा करने के लिए जाने जाते हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब जब टाइम्स ऑफ इंडिया ने फेक न्यूज फैलाने की कोशिश है। गुरुवार (20 जनवरी 2022) को इस अखबार ने तमिलनाडु के सैक्रेड हर्ट स्कूल की 20 वर्षीय लड़की द्वारा आत्महत्या करने की स्टोरी को एक अलग ही ऐंगल दे दिया। इस स्टोरी में TOI ने शीर्षक दिया, ‘जबरन कमरा साफ करवाने के कारण लड़की ने आत्महत्या की’। जबकि, स्टोरी यह है कि तमिलनाडु के तंजावुर के तिरुकट्टूपली के सैक्रेड हर्ट हाईस्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एम लवण्या पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया जा रहा था। इससे तंग आकर उसने जहर खा कर आत्महत्या कर ली। इसे लगभग मीडिया संस्थान ने कवर किया, लेकिन टोओआई ने इस मामले को पूरा अलग ही रंग देने की कोशिश की।

इससे पहले 22 अक्टूबर 2020 को एक वीडियो सामने आया था, जिसमें मौलाना/पीर नासिर उर्फ काले बाबा को एक मजार के अंदर एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया था। वह झाड़-फूँक के नाम पर महिलाओं का ऐसे ही यौन शोषण करता था। वीडियो की जाँच के बाद पुलिस ने मौलाना को गिरफ्तार कर लिया और उस पर बलात्कार का मामला दर्ज किया था। इस खबर को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया ने मौलाना या पीर लिखने की जगह तांत्रिक लिखकर आरोपी की पहचान को छुपाने का प्रयास किया। इस बात पाठकों ने भी टीओआई को लताड़ लगाई थी।

इसी तरह 25 दिसंबर 2020 को टीओआई ने जालसाज मौलाना/पीर हारून मियाँ उर्फ शाही बंगाली को तांत्रिक कहकर भ्रम फैलाया था। इन दोनों खबरों में एक बात शुरू से ही स्पष्ट हो जाती है कि आरोपित मुस्लिम है किसी भी दृष्टिकोण से तांत्रिक (हिंदू धर्म से संबंधित वो व्यक्ति, जिसने तंत्र साधना की हो, तंत्र साधना में सिद्ध हो) नहीं हो सकता है। फिर भी टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए वह ‘मौलाना/पीर’ नहीं बल्कि तांत्रिक है!