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Wednesday, October 27, 2021
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Tag: Ajay kumar Senior Journalist UP

प्रियंका अमेठी-रायबरेली कि किसी विधानसभा सीट से लड़ सकती हैं चुनाव

 लखनऊ, अजय कुमार। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना सब कुछ  झोंक देना चाहती है ताकि किसी...

अभिव्यक्ति: पिछड़ों की सियासत करने वाले क्यों ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ को...

 उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की आहट सुनाई देते ही सियासतदारों ने पिछड़ा वोट बैंक को लुभाने के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर...

अभिव्यक्ति : हवा का रूख भांप,घाटी नेताओं ने बदलेे सुर 

     जम्मू-कश्मीर काफी बदल चुका है। बदला हुआ कश्मीर देश की जनता को काफी रास आ रहा है। इसके लिए केन्द्र की मोदी...

अभिव्यक्ति: ट्विटर पर लगाम-दिखेगा व्यापक प्रभाव

  उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे  चुनावी माहौल बनने लगा है। तमाम दलों के नेताओं की यूपी में सक्रियता बढ़ गई है, जो लोकतंत्र में स्वभाविक भी है, इसी से देश को मजबूती मिलती है, लेकिन चिंता तब बढ़ जाती है जब तमाम राजनैतिक दल और उनके नेता एवं समर्थक पर्दे के पीछे से चुनाव जीतने हराने के लिए साजिशें रचना शुरू कर देते हैंै। खुले तौर पर राजनैतिक दलों द्वारा यह साजिशें अपने पक्ष में वोटों के धु्रवीकरण के लिए रची जाती हैं। इसी लिए चुनावी वर्ष में किसी भी राज्य सरकार के लिए प्रदेश मंे अमन-चैन और सौहार्द बनाए रखना आसान नहीं होता है। चुनाव जीतने के लिए जो साजिशें रची जाती हैं, उसमें बेवजह नेताओं द्वारा उतेजक और भ्रामक बयानबाजी,विरोधी दलों के नेताओं की छवि पर कुठाराघात, साम्प्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिशें, जातीय विद्वेष बढ़ाने के प्रयास जैसी घटनाएं शामिल रहती हैं तो चुनाव में विरोधियों को पटकनी देने के लिए ‘साम- दाम-दंड-भेद’ का भी सहारा लिया जाता है।

अभिव्यक्ति : मझधार में फंसा किसान आंदोलन-मुंह दिखाने लायक भी नहीं...

लखनऊ, अजय कुमार: नये कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान नेताओं का, मोदी सरकार के सख्त रवैये के कारण दम फूलने लगा है। वहीं धरना स्थल पर किसानों की लगतार कम होती संख्या ने आंदोलकारी किसानों की नींद उड़ा रखी है। एक समय था जब मोदी सरकार किसानों से बातचीत से समस्या सुलझाने के लिए बुलावे पर बुलावा भेज रही थी,तब तो किसान नेता अड़ियल रवैया अपनाए हुए थे और अब जबकि आंदोलनकारी किसान नेता चाहते हैं कि केन्द्र सरकार उन्हें वार्ता के लिए बुलाए तो सरकार बातचीत के मूड में नजर नहीं आ रही है।

अभिव्यक्ति: लोकतंत्र में विपक्ष के लिए भी तय है है ‘लक्ष्मण...

 लखनऊ, अजय कुमार: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की आंख-कान-नाक’ इस समय इसी में लगे हैं कि किस तरह से जानेलवा कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त की जा सके। किसी भी सरकार के लिए इतने लम्बे समय तक महामारी से मुकाबला करना आसान नहीं होता है। पिछले साल-डेढ़ वर्षो में कोरोना ने समाज और अर्थव्यवस्था का काफी नुकसान पहुंचाया है। भले ही समय के साथ कोरोना के ‘जख्मों’ की पीड़ा कुछ कम  हो जाए, लेकिन जिन्होंने इस महामारी में अपनों को खोया है,उनके लिए तो कोरोना की कड़वी यादों को भुलाना असंभव ही होगा।

अभिव्यक्ति : पश्चिमी यूपी में भाजपा को मिली बढ़त, किसान आंदोलन...

लखनऊ, अजय कुमार : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब तक 38317 ग्राम प्रधान, 232612 ग्राम पंचायत सदस्य तथा 55926 क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। जिस तरह से नतीजे आ रहे हैं उससे यह तय हो गया है कि गांव की सरकार बनाने में भी भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

अभिव्यक्ति : यूपी में सपा-कांगे्रस की साजिशः हिन्दू वोटरों में ‘फूट...

लखनऊ, अजय कुमार। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव में हिन्दू वोटर एकजुट होकर न रहें,इसके लिए कांगे्रस और सपा ने गोटिंया बिछाना शुरू कर दी हैं। सपा गैर जाटव दलित वोटरों को अपने पालें में खींचकर सियासी बिसात पर बाजी मारना चाह रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव मुस्लिम-यादव और गैर जाटव दलित वोटरों को सपा के पक्ष में एक जुटकर करने को आतुर हैं।

अभिव्यक्ति: जनता और किसानों को भड़काने की ओछी राजनीति में लगी...

लखनऊ, अजय कुमार :  चंद राजनैतिक दलों के नेताओं और कुछ किसान नेताओं की हठधर्मी और जुगलबंदी ने देश और मोदी सरकार के लिए संकट खड़ा कर दिया है।महामारी के इस दौर में भी यह लोग अपनी जहरीली जुबान बंद रखने को तैयार नहीं है। महामारी के इस दौर में जब इन नेताओं को देश की जनता में विश्वास पैदा करने के लिए काम करना चाहिए था,तब यह जनता को बरगलाने और भड़काने में लगा है। झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं।

अभिव्यक्ति : कोरोना आक्रमण करे,इससे पहले ही एलर्ट मोड में आ...

लखनऊ, अजय कुमार। हालात जितने भी भयावह हों, कुल लोगों की सेहत पर इसका फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे लोगों को न भगवान से डर लगता है, न अल्लाह का खौफ इनके रास्ते की बाधा बनता है। अगर ऐसा न होता तो महामारी के इस दौर में कुछ लोग दवाइयों, आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में नहीं जुटे होते। स्थिति यह है कि कोरोना के लिए जरूरी दवा बाजार में औने-पौने दामों पर भेजी जा रही है। रेमडेसीविर इंजेक्शन की भी यही स्थिति है। किल्लत के बहाने मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। पीड़ित परिवार बेबस है तो कालाबाजारी करने वाले इसी बेबसी का फायदा उठाकर हजारों-लाखों कमाने में लगे हैं।