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Thursday, February 2, 2023
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Tag: मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने चार मामलों में लिया स्वसंज्ञान; पत्नी...

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने चार मामलों में लिया स्वसंज्ञान; पत्नी के लापता होने की शिकायत करना पडा महंगा, थाने में बुलाकर की पिटाई...दस साल के बच्चे को ढाई घंटे तक लाॅकअप में रखा

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोेग ने लिया संज्ञान…सत्तर प्रतिशत बच्चों के पास...

कोरोनाकाल में बच्चों की ऑनलाइन पढाई बडी चुनौती है। प्रदेश में 70 प्रतिशत बच्चों के पास मोबाइल फोन नहीं है। केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन व नवोदय विद्यालय समिति से वर्ष 2020 और 2021 में इस तरह का सर्वें कराया था। इसमें मध्यप्रदेश की स्थिति कमजोर रही। राजस्थान और छत्तीसगढ की स्थिति मध्यप्रदेश से बेहतर है। सर्वे के अनुसार राजस्थान में सभी बच्चों के पास, तो छग में 72 प्रतिशत के पास डिजिटल उपकरण हैं। म.प्र. के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और उनके परिजनों का कहना है कि अभी घर चलाना ही मुश्किल है, ऐसे में मोबाइल फोन हम कहां से लाएं ? सतना जिले में कोरोना ने बिरला रोड निवासी मोहन से काम, तो उसके बेटे से शिक्षा छीन ली। बेटा लव छठवीं का छात्र है। मोबाइल के अभाव में डेढ साल से वह ऑनलाइन पढाई नहीं कर पाया। पिता ने कहा स्कूल बंद है।

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने लिया स्वसंज्ञान… पैरोल से फरार...

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने दो मामलों में स्वसंज्ञान लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है। पैरोल से फरार होने...

मप्र मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान : बेटे के...

भोपाल : मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय सदस्य श्री सरबजीत सिंह ने मानव अधिकार हनन से जुड़े दो मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है।

म.प्र मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान : जेलों में 300...

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जेलों में संक्रमण का खतरा बढ गया है। मध्यप्रदेश की जेलों में अभी तक 300 बंदी संक्रमित हुये हैं। जेल प्रशासन कोरोना की रोकथाम के लिये प्रयास कर रहा है, लेकिन क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण संकट से बचने के उपाय आसान नहीं है। बंदियों की संख्या कम करने के लिये जेल प्रशासन द्वारा 4500 बंदियों को पैरोल पर छोडा गया है, लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान करीब 8000 नये बंदी जेल पहुंचे हैं। इससे बंदियों की संख्या कम नहीं हुई है और शारीरिक दूरी रखने जैसे उपाय करने में भारी दिक्कतें आ रही है।