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होलिका दहन के दिन भूलकर भी नहीं करें ये 8 गलतियां, जानें सभी नियम

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 हिंदू धर्म में होली के त्योहार से एक दिन पहले होलिका जलाने की परंपरा है। फाल्गुन की पूर्णिमा को होलिका दहन होता है और फिर अगले दिन यानी चैत्री माह की पहली तिथि को होली मनाई जाती है। ऐसे में होलिका दहन का भी अहम महत्व है।

 

इस साल यानी साल 2021 में होलिका दहन 28 मार्च को है। वहीं, 29 तारीख को होली खेली जाएगी। होलिका जलाने को लेकर कुछ खास-विधान हैं, जिसका पालन किया जाना चाहिए। साथ ही कुछ खास बातों को भी ख्याल इस दिन रखा जाता है। आईए इस बारे में जानते हैं।

 

होलिका दहन पर किन बातों का रखें ध्यान

 

 इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि होलिका दहन के समय भद्रा काल नहीं होना चाहिए। भद्रा अगर मध्यरात्रि तक हो तो फिर भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जाता है।

– किसी भी हाल में भद्रा मुख में होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। हालांकि इस बार अच्छी बात ये है कि होलिका दहन जब 28 मार्च शाम को की जाएगी तो भद्रा काल नहीं रहेगा।

 होलिका दहन में भूलकर भी आम, वट, पीपल आदि की लकड़ी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस मौसम में इन तीनों की पेड़ों में नई कोपलें आने लगती है। इसलिए इन्हें जलाना अच्छा नहीं माना जाता है। गूलर या अरंड के पेड़ की लकड़ी जला सकते हैं। उपले का भी प्रयोग किया जा सकता है।

– होलिका दहन के दिन किसी को भी पैसे उधार देने की गलती नहीं करें। मान्यता है कि इस दिन रुपये-पैसों के इस तरह लेन-देन से पूरे साल घर में धन की कमी रहती है। सुख-समृद्धि कम आती है।

– होलिका दहन के दिन सफेद मिठाई, खीर, दूध, दही, बताशे आदि का सेवन नहीं किया जाता है। इससे बचने की कोशिश करें।

 ये भी मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान शाम में महिलाओं को अपने बाल खोलकर नहीं रखने चाहिए। सिर ढककर रखना चाहिए। पुत्र की लंबी उम्र के लिए इस दिन महिलाएं उपवास भी कर सकती हैं। इससे भगवान कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है।

 होलिका दहन के दिन काले चने का सेवन शुभ है। इससे भगवान शनिदेव की कृपा मिलती है। गेंहू और गुड़ से बनी रोटी खाना भी शुभ है।

 होलिका दहन के दिन माता का अपमान करने से जीवन में कष्ट और दरिद्रता का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।

 

होलिका दहन 2021: शुभ मुहूर्त

होलिका दहन के लिए इस बार शुभ मुहूर्त 2 घंटे 21 मिनट का होगा। 28 मार्च को शाम 6.51 बजे से रात 9.12 बजे तक का मुहूर्त शुभ है। इससे पहले भद्रा काल सुबह 10.13 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा।

 

(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)