Home National बेवजह ना कराएंं CT स्कैन, कैंसर का बढ़ सकता है खतरा, एम्स...

बेवजह ना कराएंं CT स्कैन, कैंसर का बढ़ सकता है खतरा, एम्स डायरेक्टर की सलाह

7
0
कोविड के चक्कर में बार-बार सीटी स्कैन कराना खतरना साबित हो सकता है। इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

जितनी तेजी से कोरोनावायरस फैल रहा है, उतनी ही तेजी से उसका आतंक भी बढ़ता जा रहा है। डर के चक्कर में कई बार लोग बेवजह डॉक्टरों के चक्कर लगा रहे हैं, जांच करवा रहे हैं और गैर-जरुरी दवाएं ले रहे हैं। समय-समय पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद ट्रेंड फैलता जा रहा है। ताजा मामला सीटी स्कैन का है, जिसका इन दिनों बुहत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। इसे देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने हिदायत दी है कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से कैंसर की संभावना हो सकती है।

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि आजकल बहुत ज्यादा लोग सीटी स्कैन करा रहे हैं। अगर सीटी स्कैन की जरूरत नहीं है तो उसे कराकर आप खुद को ही ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसकी वजह ये है कि सीटी स्कैन से आप खुद को रेडिएशन के संपर्क में ला रहे हैं और इसके ज्यादा संपर्क में आने से बाद में कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है।

एक सीटी-स्कैन 300 छाती एक्स-रे के बराबर है, यह बहुत हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सीटी-एससीएन और बायोमार्कर का दुरुपयोग किया जा रहा है। हल्के लक्षण होने पर सीटी-स्कैन कराने की कोई जरुरत नहीं है।

इसके अलावा दवाओं के दुरुपयोग को लेकर भी डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि घर में इलाज करा रहे लोग स्टेरॉइड ना लें। मध्यम लक्षण में ही स्टेरॉइड दिया जाता है। मॉडरेट बीमारी में तीन तरीके से इलाज होगा। सबसे पहले ऑक्सीजन दीजिए, क्योंकि ऑक्सीजन भी दवा है। उसके बाद स्टेरॉइड दे सकते हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे लोग अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें। ऑक्सीजन सैचुरेशन 93 या उससे कम हो रहा हो, बेहोशी जैसे हालात हो, छाती में दर्द हो तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें।

देश में 81.77 % मरीज हुए ठीक

उधऱ, देश में कोरोनावायरस की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि देश में अब तक 81.77 फीसदी मामले ठीक हुए हैं और देश में अभी भी करीब 34 लाख सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है। संक्रमण से अब तक 2 लाख के करीब मौतें हुई हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3,417 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई हैं। देश में 12 राज्य ऐसे हैं जहां 1 लाख से भी ज्यादा सक्रिय मामले हैं, जबकि 7 राज्यों में 50,000 से 1 लाख के बीच सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है। दूसरी तरफ 17 राज्य ऐसे हैं जहां 50,000 से भी कम सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है।