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मुरैना जिले की मिरघान पुलिस चौकी से चोरी गई रायफल व कारतूसों पर कुहासा बरकरार, पहले जांच की बात कह रही थी पुलिस, अब, सफाई देकर कह रही, सब कुछ मिल गया

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मुरैना जिले की मिरघान पुलिस चौकी से कारतूस चोरी नहीं गए थे। वह पहले ही गायब कर दिए गए थे। पूरे 150 कारतूस का लेखा-जोखा न देना पड़े, इसलिए इस घोटाले को छिपाने के लिए चोरी की घटना का नाम दिया गया है। चोरी गए कारतूस डकैतों को पास बहुत पहले ही जा चुके थे। अब, ये कारतूस डकैतों की बंदूकों से गरजेंगे। फिलहाल पुलिस घटना के 48 घंटे बाद कह रही है कि कारतूस चोरी ही नहीं हुए हैं, सब मिल गए हैं।

उपरोक्त जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि मिरघान पुलिस चौकी पर एक प्रभारी व दो आरक्षक मौजूद थे। चौकी प्रभारी मेडिकल लीव पर गए थे। चौकी पर दोनों आरक्षक ही रह गए थे। इन आरक्षकों के नाम नीरज गुर्जर व विक्रम परमार है। सूत्रों का कहना है कि नीरज गुर्जर का कुछ असामाजिक लोगों से मेल जोल था। वह लोग डकैत गुड्‌डा गुर्जर गैंग से मिले हुए हैं। 150 कारतूसों को पहले ही गायब किया जा चुका था। इस कारतूस घोटाले को छिपाने के लिए चोरी की घटना बनाई गई है।

पुलिस ने बताई दो कहानियां
पहली कहानी

पुलिस के एडिशनल एसपी रायसिंह नरवरिया ने कल मीडिया को बताया था कि दो बंदूकें व कारतूस गायब होने की सूचना हमें मिली। सूचना सुबह 4 या साढ़े चार बजे हमें दी गई। सूचना मिलते ही हम व एसपी साहब, यहां पहुंचे। यहां देखा तो जिस कमरे में आरक्षक सोते थे उसी में बदूकें मिल गई हैं लेकिन कारतूस गायब है। लगभग 150 कारतूस गायब हैं। तीस कारतूस मिले हैं। कुछ इधर-उधर पड़े हैं।

दूसरी कहानी
आज पुलिस ने दूसरी कहानी मीडिया को बताई। इस कहानी के अनुसार चौकी के मालखाने का ताला टूटा हुआ था। टूटा ताला देखकर तुरंत आरक्षकों ने दिमनी थाना प्रभारी को सूचना दी। दिमनी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की सूचना दी। हमें सुबह 4 या साढ़े चार बजे सूचना मिली। हमने वहां जाकर देखा तो बंदूकें तो आरक्षकों के कमरे में ही मिल गईं थीं। कारतूस भी पूरे मिल गए हैं।

दोनों कहानियों में पेंच
1-जब, दोनों बंदूकें आरक्षकों के उस कमरे में ही पाईं गई, जिसमें वह सोते थे, तो क्या आरक्षकों ने जागकर पहले बंदूकों को नहीं देखा होगा ? अगर नहीं देखा तो क्यों नहीं देखा ? आमतौर पर बंदूकें आरक्षक अपने सिर के पास या बगल में रखकर सोते हैं। ऐसे में यह कैसे हो सकता है कि आरक्षकों ने बंदूकें नहीं देखीं, लेकिन पहले मालखाने का ताला देख लिया, जैसा कि बताया कि वह टूटा हुआ था। अगर पुलिस यह कहती है कि आरक्षक कमरे में नहीं थे, वह बाहर गए थे, तो क्या ऐसा हो सकता है कि रात के समय दोनों आरक्षक अपनी बंदूकें अकेली चौकी में रखकर घूमने चले गए हों ? फिलहाल पहली ही नजर में पुलिस की यह कहानी किसी के भी गले से नहीं उतर रही है।

2-पुलिस की पहली कहानी में 150 कारतूसों के चोरी होने की बात मीडिया के सामने कही गई। साथ ही यह भी कहा गया था कि 30 कारतूस मिले हैं। कुछ इधर-उधर पड़े मिले हैं। कारतूसों की जांच की जा रही है। सवाल यह है कि पुलिस को कारतूस गिनने में पूरे 34 घंटे लग गए। 34 घंटे बाद अगले दिन दोपहर में पुलिस इस नतीजे पर पहुंची, कि कारतूस गायब ही नहीं हुए हैं। मुरैना पुलिस की गिनती कितनी धीमी है, इस बात की जानकारी जिले की जनता को आज, पहली बार लगी है।

थानों से एकत्रित करवाए जा रहे कारतूस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले की पुलिस अब 150 कारतूसों की भरपाई करने में लगी है। इन कारतूसों की भरपाई के लिए जिले के सभी पुलिस थानों से कारतूस एकत्रित करवाए जा रहे हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर मीडिया के सामने रखा जा सके। ये वह कारतूस होंगे जो पुलिस के रिकॉर्ड में चल चुके हैं।

इन अधिकारियों का कहना है
इस संबंध में एसपी ललित शाक्यवार व एडिशनल एसपी दोनों का कहना है कि दोनों बंदूकें कल ही आरक्षकों के कमरे से मिल गई थीं। बंदूक कारतूस सब मिल गए हैं। लापरवाही पर दोनों आरक्षकों को निलंबित किया गया है।