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आशा कार्यकर्ताओं का चार घंटे से कलेक्ट्रेट गेट जाम, ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे कलेक्टर, चार अफसरों को लौटाया

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नियमितीकरण, वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर जारी हड़ताल 17 वें दिन शुक्रवार को आशा कार्यकताओं का गुस्सा फूट पड़ा। आशा कार्यकर्ता व सहयोगियों ने आक्रोशित होकर कलेक्ट्रेट गेट पर जा पहुंची। दोपहर 3 बजे से आशा, ऊषा कार्यकर्ता, सहयोगियों ने बड़ी संख्या में रास्ता जाम कर दिया। 4 घंटे से कलेक्ट्रेट गेट पर बंद कर जाम लगा है।

एक महिला कार्यकर्ता चक्कर खाकर गिर पड़ी है। कलेक्टर व शिवराज सरकार के खिलाफ मां काली की वेशभूषा पहन नारेबाजी हो रही, लेकिन शाम 7 बजे तक कलेक्टर धनजंय सिंह अपने चैंबर से निकल आशा कार्यकर्ताओं से मिलने नहीं पहुंचे है। जिससे आशा कार्यकताओं का गुस्सा ओर उग्र हो रहा। गेट पर जाम लगे होने से आने-जाने में शासकीय अधिकारी, कर्मचारी व आम लोग परेशन हुए।

बता दें, 16 जून से आशा/ऊषा कार्यकर्ता एवं सहयोगी यूनियन अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रही। सरकार व प्रशासन से मांगे न माने जाने से नाराज आशाएं आक्रोशित है। शुक्रवार दोपहर तीन बजे सभी आशा कार्यकर्ता, सहयोगी कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंची है। ने काली मां के रुप में वेशभूषा पहन प्रदर्शन किया। सभी ने भाजपा सरकार और कलेक्टर के खिलाफ नारेबाजी कर रही है।

ज्ञापन लेने आएं तीन अफसर अपर कलेक्टर आदित्य रिझारिया, डिप्टी कलेक्टर वंदना जाट, एसडीएम फरहीन खान और नायब तहसीलदार से कलेक्टर को ही बुलाकर ज्ञापन देने की मांग की। दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक आशाएं जाम लगाकर कलेक्टर के खिलाफ नारेबाजी करती रही। होशंगाबाद, बाबई, सोहागपुर, बनखेड़ी, पिपरिया सहित जिलेभर से बड़ी संख्या में आशाकार्यकर्ता, सहयोगी हड़ताल में शामिल है। शाम 6.30बजे अपर कलेक्टर रिझारिया आशाओं से समझाने आएं व ज्ञापन लेने आएं। आशाओं ने कहा हम 17दिन से हड़ताल कर रहे। तीन बार ज्ञापन सौंपा। एक बार भी कलेक्टर ज्ञापन लेने नहीं आएं। आखिर क्यों नहीं आते कलेेक्टर। अपर कलेक्टर ने बताया कलेक्टर सर मीटिंग में बाहर गए। इसलिए हमें भेजा।

 

आशा कार्यकर्ता चक्कर खाकर गिर गई।
आशा कार्यकर्ता चक्कर खाकर गिर गई।
एक सप्ताह कृषि मंत्री के काफिले को रोक सुनाई थी समस्या

पीपल चौक पर आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं ने पिछले सप्ताह कृषि मंत्री कमल पटेल के काफिले को रोककर उन्हें भी अपनी समस्या सुना पीड़ा सुनाई। कृषि मंत्री से आश्वासन ही मिला था। कोई ठोस निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।

अफसरों से मिल रही धमकी

आशा कार्यकर्ता यूनियन की प्रदेश महासचिव बबीता चौबे और जिलाध्यक्ष चंपा कीर ने बताया कलेक्ट्रेट गेट पर धरने देने के दौरान यूनियन की तीन पदाधिकारियों को अंदर बुलाकर एडीएम सर ने धमकी दी कि आप लोग गेट से हट जाओ, वरना पुलिस बुलाकर सभी को उठवा देंगे। साथ ही हड़ताल खत्म करने के लिए हम पर दबाब बनाया जा रहा है। डीसीएम द्वारा कार्रवाई करने का मैसेज भेजा गया।

ये हैं मांगें

  • आशा कार्यकर्ता, सहयोगियों को कर्मचारी के रुप में नियमित किया जाएं।
  • आशाओं को 18 हजार व सहयोगियों को 24 हजार रुपए न्यूनतम वेतन दिया जाए।
  • वैक्सीनेशन की ड्यूटी में कार्यरत सभी आशा व सहयाेगियों को निर्धारित राशि का भुगतान हो।
  • कोरोना में जान गंवाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के परिवार को शासन द्वारा उपकरण के लिए विशेष भत्ता दिया जाए।
  • आशा व सहयोगियों के आकस्मिक समस्याएं, दुर्घटना, बीमारी, प्रसव और अन्य परिस्थितियों में शासकीय कर्मियों की तरह सवैतानिक अवकाश दिया जाए।