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इंदौर में कंटेनमेंट एरिया छोड़कर इंदौर में निजी क्लीनिक खोलने की छूट, ये सावधानियां आवश्‍यक

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इंदौर। इंदौर में प्रशासन ने निजी क्लीनिक खोलने की अनुमति दे दी है। इस बारे में गाइडलाइन भी तय कर दी है। इसके अनुसार कंटेनमेंट एरिया में कोई क्लीनिक नहीं खुलेगा। साथ ही कंटेनमेंट एरिया में रहने वाला कोई डॉक्टर या कर्मचारी भी क्लीनिक पर मरीजों को देखने नहीं आ सकेगा। क्लीनिक सुबह 9 से शाम 6 बजे तक चालू रह सकेंगे।

क्लीनिक के कर्मचारी बीमार हों तो उन्हें काम पर नहीं आने दिया जाएगा। हर मरीज को प्रवेश द्वार पर ही सैनेटाइज करने और थर्मल गन से बुखार भी देखना होगा। मरीज के साथ एक ही साथी रहेगा। जिला प्रशासन ने गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी पर निजी क्लीनिक संचालकों और डॉक्टरों की बैठक लेकर यह तय किया। इस दौरान सांसद शंकर लालवानी ने डॉक्टरों से कहा कि आप डरें नहीं और क्लीनिक खोलें। कलेक्टर मनीष सिंह ने डॉक्टरों से कहा कि आप सभी कोरोना योद्धाओं की तरह काम करेंगे। निजी डॉक्टर भी 50 लाख के बीमा के हकदार होंगे।

डॉ. निशांत खरे ने कहा कि सभी डॉक्टरों को डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन का पालन करना है। निजी दवाखाने शुरू करने के लिए गाइडलाइन के तहत दवाखाना संचालक को निरंतर स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में रहना होगा। यदि किसी क्षेत्र में वायरस फैलने की जानकारी मिलती है तो सावधानी रखनी होगी। किसी मरीज में कोविड के लक्षण दिखते हों या कोविड होने की आशंका हो तो उसे बुखार या फ्लू क्लीनिक या चेस्ट ओपीडी में एमवाय अस्पताल भेजना होगा।

यदि दवाखाने के डॉक्टर का कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव निकलता है तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को खबर करनी होगी। पॉजिटिव मरीज मिलने पर एक दिन दवाखाना बंद रखें और उसे सैनेटाइज करें। तमाम बिंदुओं पर एसडीएम समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। यदि किसी बिंदु का उल्लंघन पाया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में आईएमए के मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. संजय लोंढे, आईएमए अध्यक्ष डॉ. डी. शेखर राव, सचिव डॉ. ब्रजबाला तिवारी सहित कई डॉक्टर मौजूद थे।

गाइडलाइन में यह भी शामिल

60 साल से बड़े मरीजों को अलग समय दें – मरीज के अप्वॉइंटमेंट का तरीका बदलें। पहले से फोन पर अप्वॉइंटमेंट देकर जांच के लिए बुलाएं। – हर दिन आने वाले मरीजों के नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल, मरीज के लक्षण और पते की सूची बनाएं। – 60 साल से बड़े और अन्य गंभीर बीमारी के मरीजों को बीमारी की पूरी जानकारी दें। उनके लिए अलग समय रखें। – ओपीडी के समय को कम करें। एक मरीज को 15 मिनट से अ;घिळर्-ऊि्‌झ।क समय न दें। – एक समय में वेटिंग रूम में मास्क लगाकर 4 से अधिक मरीज न हों। इन सबमें 2 मीटर से अधिक की दूरी रहे। – बहुत जरूरी होने पर ही एसी चलाएं। इसे 25-27 डिग्री और 40 से 70 प्रतिशत हयूमिडिटी पर ही चलाएं। एसी डॉक्टर की कुर्सी के पीछे लगाएं। – क्लीनिक में हवा आने-जाने की बेहतर व्यवस्था हो। प्लस ऑक्सीमीटर का उपयोग जरूर करें। – वेटिंग रूम में किताबें, खिलौने जैसी चीजें नहीं रखें। – जमीन, टॉयलेट को दो बार साफ कराएं। मरीज का बिस्तर, टेबल, बीपी उपकरण, स्टेथेस्कोप, पेन, कॉल बेल, बिजली के स्विच, रैलिंग आदि साफ रखें। – वेटिंग रूम में हाथों की सफाई, मुंह पर कपड़ा लगाना, खांसने-थूकने में साव;घळर्-ऊि्‌झ।ानी वाले पोस्टर लगाने होंगे। – दरवाजे पर मरीज के लिए टिशू पेपर रखना होगा।