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माघी पूर्णिमा का मुहूर्त मंगलवार रात से, प्रयागराज में हर क्षेत्र में घाट होगा तैयार

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माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा कहते हैं। इस बार माघी पूर्णिमा व्रत 16 फरवरी को पड़ रहा है। इस दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के मुताबिक पूर्णिमा तिथि मंगलवार को रात्रि 9:42 से शुरू होकर बुधवार को रात्रि 10:25 पर समाप्त होगी। इसी दिन माघ स्नान का अंतिम स्नान होता है और इसी के साथ कल्पवास समाप्त होता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन देवता स्नान के लिए तीर्थराज प्रयाग की धरा पर आते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा तट या किसी भी नदी तट पर स्नान करने का विशेष महत्व है। माघ पूर्णिमा पर प्रात: काल स्नान करने से रोगों को नाश होता है। इस दिन गाय, तिल, गुड़, घी, लड्डू, अन्न व कंबल दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

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माघ मेले का पांचवां प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा के साथ पूरा होगा। 16 फरवरी को होने वाले स्नान के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मंडलायुक्त ने हर क्षेत्र में घाट को तैयार करने का निर्देश दिया है। इसी दिन कल्पवासी मेला क्षेत्र से अपने घर को रवाना होंगे। अधिकांश लोग पहले ही शैया दान और कथा कर लेते हैं, ऐसे में इस दिन स्नान के बाद रवानगी होती है।

इस दिन मेला क्षेत्र से निकलने वालों की भीड़ अधिक रहती है। इस दिन स्नान होने के कारण लोग अधिक आएंगे भी। ऐसे में दोनों ओर से दबाव बना रहेगा। मेले से निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते देने के निर्देश ट्रैफिक पुलिस को दिए गए हैं। जिससे ट्रैक्टर, ट्रॉली, टेंपो आदि से लोग निकल सकें। जाम के हालात न रहें, इसके लिए अभी से हर जगह पर साइनेज लगाने के लिए कहा है। भीड़ को झूंसी की ओर से भी निकलने का रास्ता दिया जाएगा। घाटों का निर्माण सोमवार से शुरू कर दिया जाएगा। जिससे इसे मंगलवार तक तैयार किया जा सके। बुधवार को ही स्नान है। प्रशासन का अनुमान है कि आखिरी स्नान पर्व पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान करेंगे।