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छठ पूजा 2021: खरना से दूसरे अर्घ्य तक बन रहे रसकेसरी समेत कई विशेष योग, ज्योतिषाचार्य से जानिए इनका महत्व

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कार्तिक माह की सूर्य षष्ठी और सप्तमी पर सूर्यदेव की अराधना से आरोग्य और यश-कीर्ति की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव की पूर्वाभिमुख होकर उपासना से उन्नति मिलती है, पश्चिमाभिमुख होकर उपासना से दुर्भाग्य का अंत होता है। इस बार छठ पर खरना से लेकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते समय तक कई विशेष योग बन रहे हैं।

दस नवम्बर को अस्ताचलगामी : सूर्यदेव को पहला अर्घ्य अर्पित करने के दिन मकर राशि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में है। तुला राशि में सूर्य, मंगल और बुध, वृश्चिक में केतु, धनु में शुक्र, मकर में शशिचंद्र, गुरु, वृष में राहु रहेंगे। गुरु चंद्रमा के साथ रहने से गजकेसरी और चंद्रमा से द्वादश भाव में शुक्र रहने से अनफा योग बनेगा।

11 नवम्बर को चंद्रमा से दशम भाव में बुध के रहने से अमलकीर्ति योग बनेगा। सूर्य और मंगल की युति से पराक्रम योग का निर्माण इस बार हो रहा है। मकर राशि श्रवण नक्षत्र में, तुला राशि में मंगल, बुध और सूर्य, वृश्चिक में केतु, धनु में शुक्र, मकर में शनि, चंद्र, गुरु और वृष में राहु रहेंगे।

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खरना से दूसरे अर्घ्य तक कई विशेष योग

महापर्व छठ पर खरना से लेकर दूसरे अर्घ्य तक कई विशेष योग इस बार बन रहे हैं, जो सूर्यदेव की अराधना करने वालों के अलावा इस काम में सहयोग करने वालों के लिए फलदायी हैं। खरना के दिन मंगलवार को बुधादित्य एवं रसकेसरी योग बनेगा। इस दिन धनु राशि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में, तुला राशि में मंगल, बुध और सूर्य रहेंगे। वृश्चिक केंद्र में होंगे, धनु शुक्र और चंद्र एवं वृष राहु में होंगे।

● सूर्य और मंगल की युति से पराक्रम योग का निर्माण

● व्रती और अनुष्ठान में शामिल श्रद्धालुओं के लिए पुण्यदायी

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इस बार छठ में बनने वाले अनफा योग से व्रती और श्रद्धालुओं की मानसिक प्रसन्नता बढ़ेगी। सूर्य और मंगल की युति से बनने वाले पराक्रम योग से आरोग्यता बढ़ेगी। वहीं, अमल कीर्ति योग से समाजिक यश के साथ पद-प्रतिष्ठा और व्यापार में वृद्धि होगी।

आचार्य पीके युग, ज्योतिषाचार्य